सोमवार, 24 अप्रैल, 2006 को 08:34 GMT तक के समाचार
नेपाल के सिंधुपालचोक ज़िले में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम नौ लोग मारे गए हैं.
सिंधुपालचोक ज़िला नेपाल की राजधानी काठमांडू के उत्तर-पूर्व में है. अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षाबलों ने माओवादियों के हमले को विफल कर दिया है.
हमले में पाँच माओवादियों, एक सैनिक और एक आम नागरिक की मौत हो गई.
उधर राजशाही विरोधी व्यापक प्रदर्शनों को देखते हुए नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को फिर दिन का कर्फ़्यू लगा दिया गया है.
लेकिन पिछले कई दिनों की तरह सैकड़ों प्रदर्शनकारी फिर भी वहाँ जमा हुए हैं.
माओवादियों ने धावा बोला
नेपाल के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष तब शुरू हुआ जब सैकड़ों माओवादियों ने चौतरा स्थित सिंधुपलचोक ज़िले के प्रशासनिक कार्यालयों, पुलिस थानों और सेना छावनियों पर धावा बोल दिया.
इस दौरान माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच लगभग छह घंटे मुठभेड़ चली. अधिकारियों के मुताबिक कई सरकारी कार्यालयों को नुकसान पहुँचा है.
बीबीसी संवाददाता सुशील शर्मा ने बताया है कि इस इलाक़े की संचार व्यवस्था कटी हुई है.
प्रदर्शनों को माओवादी समर्थन
इसी महीने नेपाल की राजनीतिक पार्टियों ने नेपाल नरेश के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए थे. इन प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद से माओवादियों का ये पहला बड़ा हमला है.
नेपाल नरेश को सत्ता से हटाने के लिए नेपाल में चल रहे आंदोलन का माओवादियों ने समर्थन किया है.
माओवादियों ने राजनीतिक पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए काठमांडू में अपने सशस्त्र अभियान को स्थगित कर दिया था लेकिन माओवादियों ने काठमांडू से बाहर अपना अभियान रोकने से इनकार किया है.
सरकारी टीवी पर घोषणा की गई कि कर्फ़्यू नेपाल के समयानुसार दिन के 11 बजे से शाम 6 बजे तक लागू रहेगा.
दूसरी ओर राजनीतिक दलों का राजा ज्ञानेंद्र के सत्ता हथियाने के ख़िलाफ़ आंदोलन जारी है और उन्होंने मंगलवार को एक बड़ी रैली का आहवान किया है.
रविवार को राजधानी काठमांडू में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुईं थीं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियाँ चलाईं और आँसू गैस छोड़ी जिससे 35 लोग घायल हो गए.
रविवार को हज़ारों प्रदर्शनकारी काठमांडू में कर्फ़्यू की परवाह न करते हुए पुलिस के नाकेबंदी को पार कर शहर के बीच पहुँचने की कोशिश करते रहे.
सुरक्षा बलों का कहना था कि उन्हें आदेश दिए गए हैं कि प्रदर्शनकारियों को महल की ओर जाने से रोकें.
दरअसल राजनीतिक दलों और राजा ज्ञानेंद्र के बीच गतिरोध बना हुआ है. विपक्षी दल पहले ही नेपाल नरेश के उस प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं जिसमें उन्होंने राजनीतिक दलों से प्रधानमंत्री चुनकर सरकार का गठन की बात कही थी.
सात राजनीतिक दलों का कहना था कि राजा को उस पूरे मसौदे को लागू करना चाहिए जो लोकतंत्र की स्थापना के लिए दिया गया है.