रविवार, 23 अप्रैल, 2006 को 12:43 GMT तक के समाचार
नेपाल में राजशाही के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन के चलते नेपाल सुर्खियों में है. आइए नज़र डालते हैं नेपाल में 18 वीं सदी से लेकर अब तक की प्रमुख घटनाओं पर.
18-19वीं शताब्दी
1768 – गुरखा शासक पृथ्वी नारायन शाह द्वारा काठमांडू को जीत कर एकीकृत राष्ट्र की स्थापना की गई.
1792 – तिब्बत में चीन के हाथों पराजय के बाद नेपाल के विस्तार पर रोक लगी.
1814-1816 – अंग्रेज़ों के साथ युद्ध, जिसकी समाप्ति पर एक संधि हुई जिसमें नेपाल की वर्तमान सीमाओं का निर्धारण हुआ.
1846 – नेपाल का शासन राणाओं के हाथों में चला गया, जिन्होंने राजतंत्र पर प्रधानता हासिल कर देश को दुनिया के बाक़ी हिस्से से अलग कर दिया.
पूर्ण राजतंत्र
1923 – ब्रिटेन के साथ संधि हुई जिसने नेपाल की संप्रभुता को सुदृढ़ किया.
1950 – भारत में स्थित राणा विरोधी शक्तियों ने नेपाल के सम्राट के साथ समझौता हुआ.
1951 – राणा शासन की समाप्ति हुई. राजघराने की श्रेष्ठता फिर से स्थापित हुई और नेपाली कांग्रेस पार्टी के राणा विरोधी विद्रोहियों ने सरकार का गठन किया.
1953 – 29 मई- न्यूज़ीलैंड़ के एडमंड हिलेरी और नेपाल के शेरपा तेनज़िंग एवरेस्ट शिखर पर पहुँचने वाले पहले पर्वतारोही बने.
1955 – नेपाल संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बना.
1959 – बहुदलीय संविधान को अपनाया गया.
1960 – नेपाली कांग्रेस पार्टी ने बी.पी. कोइराला के नेतृत्व में चुनाव जीता लेकिन महाराजा महेंद्र सत्ता पर नियंत्रण बना कर पार्टी आधारित राजनीति, संसद और संविधान को स्थगित कर देते हैं.
1962 – नए संविधान के तहत ग़ैर दलीय पंचायत का गठन किया गया. इसमें महाराज को सत्ता पर पूरी तरह से नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई. 1963 में राष्ट्रीय पंचायत के पहले चुनाव हुए.
1972 – महाराजा महेंद्र के निधन के बाद सम्राट बीरेन्द्र ने सत्ता संभाली.
बहुदलीय राजनीति
1980 – बदलावों के लिए हुए आंदोलन के बाद संवैधानिक जनमत संग्रह किया गया. कम बहुमत से वर्तमान पंचायत व्यवस्था को जारी रखने का निर्णय हुआ. नेपाल नेरश राष्ट्रीय सभा के लिए ग़ैर-दलीय आधार पर सीधे चुनावों के लिए सहमत हुए.
1985 – नेपाली कांग्रेस पार्टी ने बहुदलीय व्यवस्था को फिर से लागू करने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की.
1986 – नए चुनावों का नेपाली कांग्रेस पार्टी ने बहिष्कार किया.
1989 – भारत के साथ व्यापार विवाद के बाद भारत ने द्वारा सीमा की नाकेबंदी की जिससे नेपाल की आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ गई.
1990 – प्रजातंत्र के समर्थन में नेपाली कांग्रेस पार्टी और वामपंथी दलों ने आंदोलन की शुरुआत की. धरने प्रदर्शनों को सुरक्षाबलों ने दबाने की कोशिश की जिस दौरान कई लोग मारे जाते हैं और भारी संख्या में लोगों को गिरफ़तार किया जाता है. अतंत महाराज बीरेंद्र दबाव के आगे झुक जाते हैं और नए प्रजातांत्रिक संविधान की रचना के लिए सहमत हो जाते है.
1991 – पहले प्रजातांत्रिक चुनावों में नेपाली कांग्रेस पार्टी की विजय होती है. गिरिजा प्रसाद कोइराला को प्रधानमंत्री बनाया जाता है.
राजनीतिक अस्थिरता
1994 – अविश्वास प्रस्ताव पर कोइराला सरकार की हार हुई और नए चुनावों में कम्युनिस्ट सरकार का गठन किया गया.
1995 – कम्युनिस्ट सरकार का पतन हुआ. कट्टरवादी वामपंथी दल, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने सम्राट को हटाने और जनतांत्रिक राष्ट्र के गठन को लेकर ग्रामीण इलाकों में विद्रोह की शुरुआत की.
1997 – लगातार राजनीतिक अस्थिरता के चलते प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की हार हुई और लोकेन्द्र बहादुर चाँद नए प्रधानमंत्री बनाए गए. लेकिन पार्टी में विभाजन के बाद चाँद पर इस्तीफ़ा देने का दबाव पड़ा और सूर्य बहादुर थापा को नया प्रधानमंत्री बनाया गया.
1998 – पार्टी में विभाजन के चलते थापा को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. गिरिजा प्रसाद कोइराला गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री के रुप में एक बार फिर सत्ता संभालते हैं.
1999 – ताज़ा चुनावों में नेपाली कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिलता है और कृष्ण प्रसाद भट्टाराई को नया प्रधानमंत्री बनाया जाता है.
2000 – नेपाली कांग्रेस पार्टी में विद्रोह के बाद प्रधानमंत्री भट्टाराई को इस्तीफ़ा देना पड़ता है. पिछले 10 वर्षों में नवीं बार बनने वाली सरकार के प्रधानमंत्री के रुप में गिरिजा प्रसाद कोइराला एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाए जाते हैं.
राजमहल में हत्याएँ
2001 – एक जून – नशे में धुत्त राजकुमार दीपेन्द्र ने महाराज बीरेंद्र, महारानी एश्वर्या और अन्य निकट संबधियों की हत्या की. बाद में राजकुमार दीपेन्द्र ने ख़ुद को भी गोली मार ली.
2001 – चार जून – महल में हुई गोलीबारी के दौरान लगी चोटों की वजह से दो जून को सम्राट बनाए गए राजकुमार दीपेन्द्र की मौत हो गई. मौत के बाद राजकुमार ज्ञानेंद्र को महाराज बनाया गया.
2001 – जुलाई – माओवादी विद्रोही अपने हिंसक आंदोलन को उग्र कर देते हैं. गिरिजा प्रसाद कोईराला ने हिंसा के चलते इस्तीफ़ा दिया. इसके बाद शेरबहादुर देउबा 11 वर्षों में ग्यारहवीं बार बनने वाली सरकार के प्रधानमंत्री बनते हैं.
2001 – जुलाई – देउबा की ओर से विद्रोहियों के साथ शांति की घोषणा की जाती है और युद्ध विराम लागू हो जाता है.
2001 – नवंबर – माओवादियों का कहना कि शांतिवार्ता विफल हो गई है और युद्ध विराम लागू रखने का कोई औचित्य नहीं है. माओवादी, पुलिस और सेना की चौकियों पर सुनियोजित हमले करते हैं.
आपातकाल
2001 – नवंबर – चार दिनों की हिंसा में 100 से भी अधिक लोगों के मारे जाने के बाद, आपातकाल की घोषणा की जाती है. महाराजा ज्ञानेंद्र सेना से माओवादियौं को कुचलने का आदेश देते हैं.
2002 – अप्रैल –हमलों में हज़ारों लोगों के मारे जाने के कई दिनों बाद माओवादी विद्रोही पाँच दिनों की राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान करते है.
2002 – मई – देश के दक्षिण में सेना और विद्रोहियों के बीच तीखी झड़पें होती हैं. माओवादी विद्रोही एक महीने के युद्धविराम की घोषणा करते हैं जिसे सरकार ठुकरा देती है. प्रधानमंत्री देउबा, माओवादियों के विरुद्ध युद्ध में मदद के लिए ब्रिटेन और अन्य देशों का दौरा करते है. अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश 2 करोड़ डॉलर की मदद देने का वायदा करते हैं.
2002 – मई – संसद भंग कर दी जाती है और आपातकाल की समयसीमा बढ़ाए जाने को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच नए चुनावों की घोषणा की जाती है. नेपाली कांग्रेस पार्टी द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद देउबा अंतरिम सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए आपातकाल के समय को बढ़ा देते है.
2002 – अक्तूबर – माओवादी हिंसा के चलते प्रधानमंत्री देउबा महाराज ज्ञानेंद्र से चुनावों को एक साल आगे खिसकाने के लिए कहते हैं. महाराज देउबा को हटा कर नवंबर में होने वाले चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर देते हैं. लोकेन्द्र बहादुर चाँद को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है.
2003 – जनवरी – विद्रोही और सरकार के बीच युद्ध विराम की घोषणा की जाती है.
2003 – मई-जून- लोकेन्द्र बहादुर चाँद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे देते हैं. महाराज अपने निकट सहयोगी सूर्य बहादुर थापा को नया प्रधानमंत्री बनाते हैं.
शांति संधि की समाप्ति
2003 – अगस्त – माओवादी विद्रोही, सरकार के साथ शांतिवार्ता समाप्त कर सात महीने से चली आ रही शाँति संधि को तोड़ देते हैं. विद्रोही सितंबर में तीन दिनों की आम हड़ताल का आह्वान करते है.
2003 के आख़िरी महीनों से आगे – राजनैतिक गतिरोध के बाद छात्रों-कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़पें, हिंसा फिर से भड़की.
2004 – अप्रैल – नेपाल विश्व व्यापार संघ का सदस्य बनता है.
2004- मई – विपक्षी गुटों के धरने-प्रदर्शनों के बाद राजघराने की ओर से प्रधानमंत्री बनाए गए सूर्य बहादुर थापा इस्तीफ़ा दे देते हैं.
2004 – जून – महाराज ज्ञानेंद्र शेर बहादुर देउबा का फिर से प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं.
2004 – अगस्त - माओवादी काठमांडू की नाकेबंदी कर देते हैं जो एक सप्ताह तक चलती है. इस कारण राजधानी में ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति ठप्प पड़ जाती है.
इराक में 12 नेपाली बधंकों की हत्या के बाद काठमांडू में हिसंक प्रदर्शन होते हैं.
प्रत्यक्ष सत्ता
2005 – 1 फ़रवरी – महाराज ज्ञानेंद्र प्रधानमंत्री देउबा और उनकी सरकार को सत्ता से हटा देते हैं. वो माओवादियों को परास्त करने की बात कह कर आपातकाल की घोषणा कर देते हैं और प्रत्यक्ष रुप से सत्ता संभाल लेते हैं.
2005 – 30 अप्रैल – महाराज आपातकाल समाप्त करने की घोषणा करते हैं.
2005 – जुलाई –भ्रष्टाचार विरोधी राजसी आयोग पूर्व प्रधानमंत्री देउबा को भ्रष्टाचार के आरोप में 2 वर्ष जेल की सज़ा देता है. फ़रवरी 2006 में आयोग के निरस्त होने के बाद देउबा को मुक्त कर दिया जाता है.
2005 – सितंबर – 2003 में शांति वार्ता समाप्त होने के बाद पहली बार माओवादी विद्रोही तीन महीने के एकतरफ़ा युद्ध विराम की घोषणा करते हैं जिसे बाद में बढ़ा कर चार महीने कर दिया जाता है.
2005 – नवंबर – माओवादी विद्रोही और मुख्य विपक्षी पार्टियाँ प्रजातंत्र को बनाए रखने के लिए एक कार्यक्रम पर सहमत होते हैं.
2006 – जनवरी – माओवादी विद्रोही चार महीने से चले आ रहे युद्ध विराम को समाप्त करने की घोषणा करते है.
2006 – अप्रैल – नेपाल में राजघराने के सत्ता पर सीधे नियंत्रण के विरोध में विपक्षी पार्टियों की ओर से हड़तालों और प्रदर्शनों का आह्वान किया जाता है. राजधानी काठमांडू में तीखी झड़पें होती हैं.
2006 – अप्रैल- नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने देश की सत्ता जनता को सौंपने की बात कही. राष्ट्र को संबोधन में उन्होंने राजनीतिक दलों से अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम सुझाने को कही. लेकिन विपक्षी दलों ने उनके इस प्रस्ताव को नकार दिया है कि वे संयुक्त रुप से एक प्रधानमंत्री चुनकर सरकार का गठन कर लें.