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शुक्रवार, 21 अप्रैल, 2006 को 14:14 GMT तक के समाचार

ज्ञानेंद्र ने लोकतंत्र बहाली की माँग मानी

नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने कहा है कि वह सत्ता जनता को सौंप देंगे. राष्ट्र को संबोधन में उन्होंने राजनीतिक दलों से अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम सुझाने को कहा है.

हालाँकि उन्होंने अभी संसद के गठन या चुनाव कराने के बारे में कुछ नहीं कहा है.

शुक्रवार शाम टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधन में नेपाल नरेश ने कहा, "हम बहुदलीय लोकतंत्र और संवैधानिक राजतंत्र के प्रति वचनबद्ध हैं."

क्या नेपाल नरेश ने सँभलने में देरी कर दी?

ग़ौरतलब है कि नरेश ज्ञानेंद्र ने पहली फ़रवरी 2005 को तत्कालीन सरकार को बर्ख़ास्त करते हुए देश की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. तब उन्होंने कहा था कि माओवादी विद्रोहियों को कुचलने के लिए उन्होंने ऐसा किया है.

नेपाल पर हमारी विशेष प्रस्तुति

उनके इस क़दम के विरोध में जारी राजनीतिक आंदोलन ने पिछले पखवाड़े एक जनांदोलन का रूप ले लिया.

पिछले 15 दिनों के दौरान नेपाल में राजशाही के विरोध में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए. इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक भिड़ंतें भी हुईं.

संप्रभुता जनता के नाम

राष्ट्र को संबोधन में नेपाल के 1990 के संविधान के अनुच्छेद 35 का उल्लेख करते हुए नरेश ज्ञानेंद्र ने कहा, "हम राष्ट्र की संप्रभुता जनता को सौंपते हैं. हम आशा करते हैं कि बहुदलीय लोकतंत्र की रक्षा से देश में शांति-व्यवस्था स्थापित होगी."

राजा ज्ञानेंद्र ने सात दलीय विपक्षी गठजोड़ को अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम सुझाने को कहा है.

काठमांडू से बीबीसी संवाददाता निक ब्रायन्ट के अनुसार नरेश ज्ञानेंद्र की ताज़ा घोषणा विपक्ष की एक बड़ी माँग को पूरा करती है, लेकिन यह देखने वाली बात होगी कि जनता का इस पर क्या रुख़ होता है.

हालाँकि बीबीसी संवाददाता के अनुसार नेपाल नरेश की ताज़ा घोषणा के बाद राजधानी काठमांडू की सड़कों पर जनता ख़ुशी मनाती देखी गई.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

नेपाल में प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने राजा ज्ञानेंद्र को नाकाफ़ी बताते हुए विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है.

सात दलों के विपक्षी गठजोड़ के एक नेता और पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने कहा है कि नेपाल नरेश की घोषणा पर विचार-विमर्श के बाद ही वो कोई टिप्पणी करेंगे.

उल्लेखनीय है कि विपक्षी गठजोड़ संविधान में संबोधन कर नरेश के अधिकार में कटौती चाहता है.

भारत के विदेश विभाग के एक बयान में राजा ज्ञानेंद्र की घोषणा का स्वागत किया गया है.

इस बीच राजा ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा.