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गुरुवार, 13 अप्रैल, 2006 को 13:33 GMT तक के समाचार

अलेस्टेयर लीथेड
बीबीसी संवाददाता, काबुल से

अफ़ग़ानिस्तान पर भारत का बढ़ता प्रभाव

अगर आप अफग़ानिस्तान के सिनेमाघरों में जाना चाहते हैं तो इसके लिये ज़रूरी है कि आप हिंदी फिल्मों के प्रशंसक हों. भारत से यहॉं आने वाली फिल्मों के अंबार लगे हैं.

यहाँ के लोग भारतीय संस्कृति से बेहद प्रभावित हैं. और अब भारतीय पैसा भी इनके जीवन पर खासा असर दिखा रहा हैं.

काबुल में भारत के वरिष्ठ राजनयिक संदीप कुमार का कहना, "हमने बुनियादी ढ़ाँचे, टेलिकॉम, स्वास्थ्य और दीगर संस्थाओं को 60 करोड़ डॉलर देने का फैसला किया है."

उन्होंने कहा, "हम ऊर्जा के क्षेत्र में 11 करोड़ डॉलर ख़र्च कर रहे हैं. हमने अफगा़निस्तान को तीन एयरबस विमान देने की घोषणा की है. इसके अलावा हम 218 किलोमीटर सड़क का निर्माण भी कर रहे है."

नामी स्कूल, भारत का नाम

काबुल में हबीबा हाई स्कूल के बोर्ड पर आसानी से अनुदान देने वाले देश का नाम देखा जा सकता है. इस पर लिखा है ‘भारत सरकार’.

स्कूल के शिक्षक ग़फूर मिर्ज़ा काफी खुश हैं. यह स्कूल युद्ध के दौरान ध्वस्त हो गया था. इस विख्यात स्कूल से इस देश के तीन राष्ट्रपति शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं.

मिर्ज़ा के मुताबिक भारत ने, न सिर्फ स्कूल का नवनिर्माण कराया बल्कि किताबें तक उपलब्ध कराई.

लेकिन सवाल यह है कि भारत यह सब क्यों कर रहा है? क्या इसका अफ़गा़नी सत्ता से कोई स्वार्थ जुड़ा है.

इतिहास पर नजर डालें तो भारत और अफगा़निस्तान क़रीबी दोस्त रहे है. लेकिन यह भी संभव है कि यह सब अफग़ानिस्तान से राजनीतिक समर्थन हासिल करने की रणनीति हो.

अफ़ग़ानिस्तान के समाज विज्ञानी वज़ीर सैफ़ी कहते हैं कि भारत इस क्षेत्र में अपना असर बढ़ाना चाहता है, और भारत और अफग़ानिस्तान के मज़बूत होते रिश्ते से पाकिस्तान खुश नहीं है.

हाल ही में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों में कड़वाहट बढ़ी है. जबकि करज़ई का हालिया भारत दौरा काफी सफल साबित हुआ है.