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गुरुवार, 13 अप्रैल, 2006 को 13:16 GMT तक के समाचार

'सत्ता मिली, तो पोटा जैसा क़ानून लाएँगे'

अपनी भारत सुरक्षा यात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में वापस लौटी तो पोटा जैसा क़ानून ज़रूर लाएगी. उन्होंने उन आरोपों का भी खंडन किया कि उनकी यात्रा से अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है.

लालकृष्ण आडवाणी से अल्पसंख्यकवाद, आरक्षण, सोनिया गांधी के इस्तीफ़े जैसे मुद्दे पर विस्तृत बात की हमारे सहयोगी श्याम सुंदर ने. प्रस्तुत है इस बातचीत के अंश.

भारत सुरक्षा यात्रा से इसी तरह के जनसमर्थन की अपेक्षा आपने की थी?

जी हाँ, मुझे विश्वास था कि यात्रा हमेशा इसी प्रकार का जनसमर्थन प्राप्त करती है. लेकिन मैं यह ज़रूर कहूँगा कि मौसम के लिहाज से देखें तो जनता का समर्थन अनपेक्षित था.

आपके यात्रा का सबसे अहम मुद्दा अल्पसंख्यकवाद के ख़िलाफ़ है, लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि इस अभियान से अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा होती है?

यात्रा के दौरान अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना कहीं नहीं दिखी है. मैंने पहली बार देखा कि अल्पसंख्यक भी सभाओं में आते थे. इतना ही नहीं एक दो जगह तो अल्पसंख्यकों की बैंड ने स्वागत भी किया.

मेरा मानना है कि मुस्लिम समाज में सुशिक्षित धीरे-धीरे इसे मानने लगे हैं कि इनका केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया जाता है इनके कल्याण की चिंता नहीं है. नहीं तो 58 साल बाद सरकार को यह लगे कि देश में मुसलमानों की स्थिति इतनी ख़राब है कि उसके लिए जस्टिस सच्चर कमेटी बनानी चाहिए जो इस बात की जाँच करे कि मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक दुर्दशा क्यों है?

इन 58 वर्षों में से 45 से 50 वर्ष तो केंद्र या प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की ही सरकार रही है. अगर इतने वर्षों तक शासन रहने के बाद समस्या है तो वह सबके लिए हैं. लेकिन अगर उनको लगता है कि मुसलमानों की विशेष ख़राब हालत हैं तो उसके उत्तरदायी स्वयं कांग्रेस ही है.

एक जनसभा में आपने पोटा पर ज़ोर देते हुए कहा इसे हटाया जाना गलत है. लेकिन पोटा को लेकर अल्पसंख्यकों के मन में भय था और इस क़ानून के ख़िलाफ़ माहौल बन गया था?

पोटा बनने से पहले कांग्रेस पार्टी ने विरोध शुरू किया. कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम समाज में यह संकेत देना चाहा कि पोटा मुस्लिमों के ख़िलाफ़ है. इसमें से भाव यह निकलता है कि जो आतंकवादी है वह मुसलमान हैं.

भारतीय जनता पार्टी को केंद्र में सत्ता मिली तो पोटा जैसा क़ानून लाएँगे?

ज़रूर लाएँगें. मेरा मानना है कि आंतकवादी संगठन के बीच जो वित्तीय लेन-देन होता उसे रोकने का दूसरा कोई क़ानून नहीं है.

दो बड़े सहयोगी उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह और सुश्री उमा भारती- जो निकाले गए. कल्याण सिंह तो वापस आ गए पर सुश्री उमा भारती के बारे में कुछ गुंजाइश बची है?

मैं इस विषय पर कुछ नहीं कहूँगा. अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के बाद संसदीय कार्य पर अपना ध्यान केंद्रित करता हूँ. इन बातों पर नए अध्यक्ष ही कोई फ़ैसला कर सकते हैं.

सोनिया गांधी के इस्तीफ़े को लेकर राष्ट्रपति को जब ज्ञापन देने गए थे उस वक़्त आपने कहा था कि सरकार आर्डिनेंस लाने की तैयारी कर रही है लेकिन सुबह पूरा दृश्य ही बदल गया था जब सोनिया गाँधी ने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी.

इसमें कोई जाल नहीं है. अगर जया बच्चन की तरह इनको अयोग्य किया जाता तो कांग्रेस पार्टी को बहुत आघात लगता. इसमें त्याग की कोई बात नहीं है. त्याग तब होता जब वह कहतीं कि वे फिर से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगी.

आरक्षण के बारे में आपका क्या कहना है ?

पूरी तरह से प्रस्ताव आने के बाद ही उस पर बोलना चाहूँगा. अभी तो सरकार में इस पर सहमति नहीं है. स्थिति साफ हो जाए तो मैं ज़रूर बोलूँगा.