बुधवार, 12 अप्रैल, 2006 को 11:55 GMT तक के समाचार
मुंबई हाई कोर्ट ने डांस बारों पर लगे प्रतिबंध को ग़लत करार देते हुए इस प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया है.
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के इस फ़ैसले को भेदभावपूर्ण बताया हैं और कहा है कि इससे समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता हैं.
राज्य सरकार को इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया हैं.
फ़ैसले में कहा गया हैं कि इस आदेश के बाद बार मालिक नए लाइसेंस के लिए फिर से आवेदन कर सकते हैं.
हाई कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद डांस बार में नाचने वाली महिलाओं और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत मिली हैं.
झटका
फ़ैसले से राज्य सरकार को एक करारा झटका लगा हैं क्योंकि राज्य सरकार ने डांस बारों को बंद करने का आदेश जारी करते हुए यह दलील रखी थी कि इन बारों की वजह से अपराध और वेश्यावृत्ति को बढ़ावा मिलता हैं.
पिछले वर्ष ही महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में चल रहे तमाम डांस बारों को बंद करने का आदेश जारी किया था. इसके बाद से राज्य भर में डांस बार बंद हो गए थे.
हालांकि राज्य सरकार का यह प्रतिबंध केवल डांस बारों पर ही लागू था. बड़े पाँच सितारा होटलों में चलने वाले बार इसके दायरे से बाहर थे.
राज्य भर में चल रहे क़रीब 14 सौ बार और इनमें काम करने वाली एक लाख महिलाएँ इस फ़ैसले से प्रभावित हुई थीं.
इनमें से आधे से अधिक महिलाएँ राज्य सरकार के इस आदेश के लागू होने के बाद बेरोज़गार हो गई थीं जबकि कई महिलाओं को अपने गुज़ारे के लिए वेश्यावृत्ति अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा था.