रविवार, 09 अप्रैल, 2006 को 18:57 GMT तक के समाचार
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने चुनाव आयोग के इन आरोपों को निराधार करार दिया है कि उन्होंने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है.
अर्जुन सिंह ने पिछले दिनों शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण संबंधी योजना की बात कही थी. उनका कहना है कि यह आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है क्योंकि केंद्र सरकार ने अभी तय नहीं किया है कि कितना प्रतिशत आरक्षण दिया जाए.
सिंह के हवाले से आरक्षण संबंधी ख़बर मीडिया में आने के बाद चुनाव आयोग ने कैबिनेट सेक्रेटरी को नोटिस देकर कहा था कि अर्जुन सिंह का यह क़दम आचार संहिता का उल्लंघन प्रतीत होती है.
इस समय देश के पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया जारी है. आयोग के नोटिस का जवाब देते हुए सिंह ने कहा, " मैंने किसी भी प्रकार रियायतों की घोषणा नहीं की है.फिलहाल केंद्र सरकार ने यह तय नहीं किया है कि कितना प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए."
सिंह का कहना था कि यह बहुत दुखद है कि आयोग ने सिर्फ मीडिया की ख़बरों के आधार पर इस कथित घोषणा को चुनावों से जोड़कर देखा.
अर्जुन सिंह का कहना है कि जब किसी अख़बार ने उनसे सवाल किया कि सरकार इस बाबत कब घोषणा करेगी तो उन्होंने कहा था कि फ़ैसला लिया जाएगा और चुनावों के बाद इसकी घोषणा की जाएगी.
उन्होंने कहा कि 104 वें संशोधन के बाद संविधान की धारा 15(5) के तहत आरक्षण संबंधी क़ानून बन गया है जिसे इस साल बीस जनवरी को राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है.
मानव संसाधन मंत्रालय ने अन्य पिछड़ी जातियों के आरक्षण को बढाकर 27.5 फ़ीसदी करने का प्रस्ताव किया है. यह प्रस्ताव विधानसभा चुनावों के बाद प्रभावी होगा.
प्रावधान
केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में इस समय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए (22.5 प्रतिशत) आरक्षण का प्रावधान है.
अब सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान करना चाहती है.
लेकिन इस प्रस्ताव की ख़बरें आते ही देश में विरोध शुरू हो गया है. छात्र संगठनों के अलावा कई बुद्धिजीवियों ने इसका विरोध किया है.
उनका कहना है कि इससे उच्च वर्ग के योग्य छात्रों के रास्ते बंद हो जाएँगे.
ग़ौरतलब है कि शिक्षा और नौकरियों में पिछड़े वर्ग के आवेदकों को आरक्षण देने की शुरुआत 15 साल पहले मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने के साथ हुई थी.