शुक्रवार, 07 अप्रैल, 2006 को 12:15 GMT तक के समाचार
भारत का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़ कर 100 अरब डॉलर के जादुई आँकड़े को पार कर गया है. हालाँकि भारत का आयात कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ा है.
वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि वर्ष 2005-06 में भारत का निर्यात 101 अरब डॉलर के बराबर रहा.
हालाँकि कमलनाथ ने स्वीकार किया कि पिछले साल हुआ आयात भी बढ़ कर 140 अरब डॉलर हो गया.
निर्यात में बढ़ोत्तरी से कहीं ज़्यादा वृद्धि आयात में होने के कारण भारत का व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है.
कमलनाथ ने कहा, "वर्ष 2005-06 में भारत का व्यापार घाटा 39 अरब डॉलर का रहा, जो कि इससे पहले के साल के मुक़ाबले 14 अरब डॉलर ज़्यादा है."
सरकारी प्रयास
कमलनाथ ने कहा कि निर्यात के सौ अरब डॉलर के जादुई आँकड़े को पार करने में मुख्य योगदान सरकार की विदेश व्यापार नीति का रहा है.
कमलनाथ के अनुसार 2004 में नई विदेश व्यापार नीति लागू किए जाने के बाद से भारत के निर्यात में क़रीब 60 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.
वर्ष 2005-06 में निर्यात का स्तर इससे पहले के वर्ष से 25 प्रतिशत ज़्यादा रहा है. दूसरी ओर इस अवधि में आयात का स्तर भी इससे पहले के साल के मुक़ाबले 32 प्रतिशत ज़्यादा रहा.
कमलनाथ ने कहा कि भारत का आयात बिल बढ़ाने में मुख्य भूमिका तेल की है. उन्होंने कहा कि तेज़ी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में आयात का 30 प्रतिशत हिस्सा तेल का होता है.
उन्होंने इसके लिए तेल की बढ़ी क़ीमत को भी दोष दिया.
कमलनाथ ने कहा, "यदि आप तेल को छोड़ दें तो आयात के मुक़ाबले निर्यात की मात्रा बढ़ी ही है."
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था भले ही बहुत तेज़ी से बढ़ रही हो, विश्व व्यापार में भारत का योगदान एक प्रतिशत से भी कम है.