गुरुवार, 30 मार्च, 2006 को 11:12 GMT तक के समाचार
ताज़ा शोध के मुताबिक़ दक्षिण भारत में एचआईवी संक्रमण में एक तिहाई तक की कमी आई है.
भारत और कनाडा के शोधकर्ताओं के साझा अध्ययन से पता चला है कि सुरक्षित यौन संबंध को बढ़ावा देने वाले अभियानों का काफ़ी अच्छा असर हुआ है.
लैंसेट पत्रिका के इस शोध में गर्भवती महिलाओं और यौन रोगों का इलाज कराने वाले युवाओं का अध्ययन किया गया.
भारत में लगभग पचास लाख लोग एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त हैं और उनका लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण भारत में रहता है.
भारत में एचआईवी के फैलने का मुख्य कारण वेश्यावृत्ति को माना जाता है, यह संक्रमण आम घरेलू महिलाओं में भी फैल गया है क्योंकि ज़्यादातर मामलों में पतियों की वजह से पत्नियों तक संक्रमण पहुँचा है.
अभियान
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार और विश्व बैंक सहित कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने जागरूकता अभियान चलाया है, ख़ास तौर पर यौनकर्मियों के बीच.
इस ताज़ा शोध का नेतृत्व करने वाले टोरंटो यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर प्रभात झा कहते हैं कि जागरूकता अभियान इतने सफल रहे हैं कि आलोचकों का मुँह बंद हो गया है.
उन्होंने कहा, "कई तरह की भविष्यवाणियाँ की जा रही थीं जिनमें से ज़्यादातर अनुमान पर आधारित थे, कहा जा रहा था कि भारत में अफ्रीका की तरह एड्स का महाविस्फोट होगा लेकिन अब साफ़ पता चल रहा है कि स्थिति में सुधार हो रहा है."
प्रभात झा कहते हैं, "अच्छी ख़बर है कि दक्षिण भारत में एचआईवी संक्रमण युवाओं में कम हो रहा है, इसकी एक ही वजह हो सकती है कि लोग सुरक्षित सेक्स की ओर प्रेरित हुए हैं."
प्रोफ़ेसर झा का कहना है कि उत्तर भारत में भी इस तरह के अध्ययन होने चाहिए तभी पूरे देश की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.