बुधवार, 29 मार्च, 2006 को 18:09 GMT तक के समाचार
पश्चिम बंगाल के अख़्तर को नींद में बड़बड़ाने की आदत इतनी महंगी पड़ेगी वह नहीं जानते थे.
सोते में उनके मुँह से तीन बार तलाक़, तलाक़, तलाक़ निकल गया और गाँव के बड़े-बूढ़ों ने उन पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि अब वह अपनी पत्नी के साथ नहीं रह सकते.
अख़्तर ने इस मांग को ठुकरा दिया और अपनी पत्नी से अलग होने से साफ़ इंकार कर दिया.
कोलकाता में बीबीसी के अमिताभ भट्टासाली का कहना है कि कई मुस्लिम अधिकारियों ने गाँव के बुज़ुर्गों के फ़ैसले की आलोचना की है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि तलाक़ तभी होता है जब वह इरादतन दिया गया हो.
उत्तर-पश्चिमी बंगाल के दलगाँव बस्ती गाँव के मौलवियों को इस क़िस्से के बारे में तब पता चला जब अख़्तर की पत्नी सबीना ने अपनी सहेलियों से इसका ज़िक्र किया.
उसके बाद इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब दोनों पति-पत्नी स्थानीय परामर्श केंद्र में सलाह लेने गए.
अख़्तर का कहना है कि पत्नी से झगड़ा होने के बाद उन्होंने नींद की गोलियाँ खा ली थीं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "नींद में मैंने तलाक़, तलाक़, तलाक़ कह दिया होगा. मेरा ऐसा इरादा नहीं था".
वह कहते हैं, "यह तो बेइंसाफ़ी है कि नींद में बेख़्याली में कुछ कहने की वजह से मैं अपनी पत्नी से अलग रहूँ".
बहिष्कार
उनका कहना है कि गाँव वालों ने उनका बहिष्कार कर दिया है क्योंकि उन्होंने मौलवियों का फ़ैसला मानने से इंकार कर दिया है.
सबीना कहती हैं, "लोग हमारा मज़ाक़ उड़ाने लगे हैं. लेकिन चाहे जो हो, मैं अपने पति से दूर नहीं रह सकती".
अख़्तर के पिता इबादत इस बात को मानते हैं कि मौलवियों ने ग़लत फ़ैसला किया है.
लेकिन ख़ामियाज़ा उन्हें भी भुगतना पड़ रहा है क्योंकि उनकी लोगों ने उनकी आटा-चावल की दुकान पर आना बंद कर दिया है.
उधर, मौलवी अपने फ़ैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
उनका कहना है कि ये दोनों तभी साथ रह सकते हैं जब वे एक दूसरे से पुनर्विवाह करें.
लेकिन इस्लाम के नियमों के अनुसार पुनर्विवाह तभी संभव है जब पत्नी किसी और से शादी करे और फिर तलाक़ ले.
अख़्तर और सबीना ने इस स्थिति से बचने के लिए पिछले सप्ताह अपना विवाह रजिस्टर करा लिया है.
अब देखना यह है कि क्या इससे काम चल जाएगा.