मध्यप्रदेश विधानसभा के सभी 39 कांग्रेस विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के समर्थन में सामुहिक त्यागपत्र देने की पेशकश की है.
क़रीब 25 विधायकों का एक दल शनिवार की सुबह दिल्ली पहुँचा जहाँ उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की और अपना ज्ञापन सौंपा.
कांग्रेस विधायक राहुल सिंह ने बताया कि ज्ञापन में सभी कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी की नेता सोनिया गाँधी के समर्थन में इस्तीफ़ा देने की अनुमति माँगी है.
मध्यप्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष और पार्टी के विधायक हज़ारीलाल रघुवंशी ने कहा है, "हमारी नेता ने इतना बड़ा त्याग किया है. हम उनके लिए कुछ भी कर सकते हैं."
बीबीसी ने कांग्रेस विधायक और मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष की नेता जमुना देवी से पूछा कि सोनिया गांधी पार्टी की अध्यक्ष हैं और लाभ के पद मामले को लेकर उनकी राज्य सभा सदस्यता को लेकर विवाद चल रहा था, जिसपर उन्होंने इस्तीफ़ा दिया लेकिन ऐसे में पार्टी के विधायकों को इस्तीफ़ा देने की क्या ज़रूरत है?
इस सवाल के जवाब में जमुना देवी ने कहा, "हम पार्टी अध्यक्ष के साथ हैं. उन्होंने जो उदाहरण पेश किया है, उसके समर्थन में हमने अपने इस्तीफ़े देने की पेशकश की है परंतु उन्होंने हमें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी."
इससे पहले राज्य विधानसभा में विपक्षी पार्टी ने कई मंत्रियों और विधायकों के लाभ के पदों पर बने रहने का मुद्दा विधानसभा में उठाया था.
आरोप
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफ़े की भी माँग रखी थी.
हज़ारीलाल रघुवंशी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ख़ुद भी लाभ के कई पदों पर आसीन हैं.
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सांसद होने के अलावा सदन में भाजपा के नेता भी हैं. साथ ही 'माध्यम' नाम की एक सरकारी संस्था के अध्यक्ष भी हैं.
कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि राज्य सरकार के 11 मंत्री और चार भाजपा विधायक एक साथ कई पदों का लाभ उठा रहे हैं.
विधायकों के दल ने इस बाबत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाक़ात की.
विधायकों ने प्रधानमंत्री से माँग की कि इस मामले की जाँच के लिए एक दल मध्यप्रदेश भेजा जाए. साथ ही राज्य में बाढ़ पीड़ितों को उचित मुआवज़ा न मिलने की शिकायत भी की.