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शनिवार, 25 मार्च, 2006 को 07:43 GMT तक के समाचार

धर्मांतरित शख्स पर अफ़ग़ानिस्तान में बैठक

ख़बरों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने एक विशेष बैठक बुलाई है जिसमें मुसलमान से ईसाई बने अफ़ग़ान नागरिक अब्दुल रहमान के बारे में फ़ैसला किया जाएगा.

पंद्रह साल पहले धर्मांतरण के बाद ईसाई बने अब्दुल रहमान को शरिया क़ानूनों के तहत मौत की सज़ा हो सकती है.

इसके पहले राष्ट्रपति हामिद करज़ई के एक प्रवक्ता ने कहा था कि अब्दुल रहमान को जल्द रिहा किया जा सकता है.

अब्दुल रहमान पिछले कुछ दिनों से विवादों के घेरे में हैं. दरअसल वो एक ईसाई सहायता एजेंसी में काम करते हुए मुसलमान से ईसाई बन गए थे.

अफ़ग़ानिस्तान की सरकार कहती रही है कि अब्दुल रहमान के बारे में फ़ैसला न्यायपालिका पर निर्भर है.

लेकिन आम अफ़ग़ान नागरिक मानते हैं कि अब्दुल रहमान ने ग़लती की है और उन्हें मृत्युदंड मिलना चाहिए.

यही माना जा रहा था कि अब्दुल रहमान के लिए बचने का एक ही रास्ता है कि वो फिर से मुसलमान हो जाएँ.

दबाव

उनकी स्थिति पर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और कई अन्य पश्चिमी देशों के नेता चिंता व्यक्त कर चुके हैं.

गुरुवार को अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से इस मुद्दे के 'संतोषजनक हल' का अनुरोध किया था.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि जब उन्होंने इस बारे में पढ़ा तो उन्हें बहुत दुख हुआ.

इस मामले पर अमरीका और नैटो के तीन सदस्य देशों ने भी चिंता ज़ाहिर की है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में न्यायपालिका में धार्मिक कट्टरपंथियों का प्रभुत्व है और राष्ट्रपति और सरकार के लिए न्यायपालिका से टकराना मुश्किल होगा.

उधर अफ़ग़ानिस्तान में मौलवियों का कहना है कि अन्य देश अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी मामलों में दख़ल देना बंद करना चाहिए.