अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा है कि मुसलमान से ईसाई बने अफ़ग़ान नागरिक अब्दुल रहमान को जल्द रिहा किया जा सकता है.
पंद्रह साल पहले धर्मांतरण के बाद ईसाई बने अब्दुल रहमान अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं और शरिया क़ानूनों के तहत उन्हें मौत की सज़ा हो सकती है.
बीबीसी को एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले पर सरकार की एक विशेष बैठक शनिवार को होगी.
पश्चिमी देशों का दबाव
उनकी स्थिति पर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और कई अन्य पश्चिमी देशों के नेता चिंता व्यक्त कर चुके हैं.
गुरुवार को अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से इस मुद्दे के 'संतोषजनक हल' का अनुरोध किया था.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि जब उन्होंने इस बारे में पढ़ा तो उन्हें बहुत दुख हुआ.
इस मामले पर अमरीका और नैटो के तीन सदस्य देशों ने भी चिंता ज़ाहिर की है.
इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान की सरकार कहती रही है कि अब्दुल रहमान के बारे में फ़ैसला न्यायपालिका पर निर्भर है.
बीबीसी संवाददाता संजोय मौजुमदार का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में न्यायपालिका में धार्मिक कट्टरपंथियों का प्रभुत्व है और राष्ट्रपति और सरकार के लिए न्यायपालिका से टकराव करना मुश्किल होगा.
लेकिन उनका ये भी कहना है कि अफ़ग़ान राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ी समस्या ये होगी कि आम अफ़ग़ान नागरिक मानते हैं कि अब्दुल रहमान ने ग़लती की है और उन्हें मृत्युदंड मिलना चाहिए.
अब तक यही माना जा रहा था कि अब्दुल रहमान के लिए बचने का एक ही रास्ता है कि वो फिर से मुसलमान हो जाएँ.
उधर अफ़ग़ानिस्तान में मौलवियों का कहना है कि अन्य देश अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी मामलों में दख़ल देना बंद करें.