गुरुवार, 23 मार्च, 2006 को 13:08 GMT तक के समाचार
विनोद शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने न केवल अपनी गरिमा बढ़ाई है बल्कि पार्टी को गहरा रहे संकट से भी उबार लिया है.
उन्होंने लोकसभा से इस्तीफ़ा देकर न केवल जनता में अपनी छवि को निखारा है बल्कि विपक्ष को निरुत्तर कर दिया है.
मेरा मानना है कि हमारे देश के लोगों पर महात्मा गांधी का गहरा असर है. जो शख्स सत्ता का त्याग करता है, जनता उसे हाथोंहाथ लेती है.
विश्वनाथ प्रताप सिंह ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दिया था तो लोगों ने उन्हें सर आंखों पर बिठाया था.
जब उन्हें कांग्रेस से निकाला गया था, उसके बाद मैं उनके साथ देश के विभिन्न हिस्सों में दौरे पर गया था. मैंने देखा था कि लोगों की उनके प्रति किस तरह की भावनाएँ थीं.
चंद्रशेखर के बारे में कहा जाता है कि वो देश की राजनीति अपने हिसाब से करते है न कि जनता के मानस के हिसाब से. अगर वो अपनी राजनीति जनता के मानस के हिसाब से करते तो ख़ासे लोकप्रिय होते.
सोनिया गांधी ने तीसरी बार ऐसा दिखाया है कि उन्हें सत्ता का मोह नहीं है. इसके पहले जब पार्टी में ही उनके विदेशी मूल के मुद्दे पर सवाल उठाया गया था तो उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
इसके बाद जब वो प्रधानमंत्री बन सकती थीं तो उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनवा दिया.
तीसरी बार अब उन्होंने लोकसभा की सदस्यता और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
वैसे सच्चाई तो यह है कि लाभ के पद की व्याख्या के लिए एक नए क़ानून की ज़रूरत है. जो लाभ के पदों की व्याख्या करे और जिसमें निजी क्षेत्रों के पदों को भी शामिल किया जाए.
लाभ के पद में केवल सरकारी पद नहीं, उसके बाहर के भी पद शामिल हों.