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गुरुवार, 23 मार्च, 2006 को 11:44 GMT तक के समाचार

इस्तीफ़े पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा से इस्तीफ़ा देकर सबको चौंका दिया है.

काँग्रेस पार्टी इस फ़ैसले को राजनैतिक नहीं बल्कि नैतिक और निजी फ़ैसला बता रही है.

काँग्रेस

काँग्रेस पार्टी के प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि "सोनिया गांधी को संसद में लगातार निशाना बनाया जा रहा था इसलिए उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला ख़ुद लिया. यह रणनीतिक फ़ैसला नहीं है."

राजीव शुक्ला ने कहा, "सोनिया गांधी ने दूसरी बार त्याग की मिसाल पेश की है, उन्होंने दिखा दिया है कि समाजवादी पार्टी और भाजपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं."

भाजपा

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता अरूण जेटली ने कहा है कि "सोनिया गांधी का इस्तीफ़ा दोष की स्वीकारोक्ति है. उन्होंने अपनी छवि को बचाने के लिए घबराहट में फैसला किया है."

उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी और उनके सहयोगी संविधान का उल्लंघन करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए, सोनिया गांधी अपनी रची हुई साज़िश का शिकार हो गई हैं."

जेटली ने कहा कि पार्टी के दो वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह इस समय दिल्ली में नहीं हैं उनके दिल्ली पहुँचने के बाद भाजपा आगे की रणनीति तय करेगी.

समाजवादी पार्टी

इस बीच समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने स्पष्ट किया है कि अमर सिंह संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा नहीं देंगे, अमर सिंह उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास परिषद के अध्यक्ष हैं इसलिए उन पर भी इस्तीफ़ा देने का दबाव था.

समाजवादी पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही लाभ के पद के मामले पर एक क़ानून बना दिया था जिसके तहत अमर सिंह को इस्तीफ़ा देने की आवश्यकता नहीं है.

वामपंथी दल

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता डी राजा ने सोनिया गांधी के फ़ैसले को 'नैतिक निर्णय' बताया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने घोषणा की है कि उनके सांसद इस मामले में इस्तीफ़ा नहीं देंगे और उन्होंने ज़ोर दिया है कि लाभ के पद की व्याख्या संसद को करनी चाहिए.

सीपीएम के वरिष्ठ नेता और सांसद नीलोत्पल बसु ने कहा है कि लाभ के पद से संबंधित कानून की संसद में बहस के बाद नई परिभाषा की जानी चाहिए.