मंगलवार, 21 मार्च, 2006 को 03:19 GMT तक के समाचार
प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने स्कोर्पीन पनडुब्बी ख़रीदी मामले में घोटाले के 'पुख़्ता सबूत' होने का दावा करते हुए कहा है कि इस सौदे को रद्द कर एक जाँच आयोग बैठाया जाए.
एनडीए नेताओं ने इसे यूपीए सरकार का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए कहा है कि फ़्रांस के साथ 187.98 अरब रुपयों के इस सौदे में चार प्रतिशत कमीशन दिया गया था.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो इस पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है लेकिन रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने किसी भी घोटाले से इंकार करते हुए कहा है कि यदि किसी को भी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाएगा तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि भारत में सैन्य ख़रीदी में किसी भी मध्यस्थ यानी दलाल की अनुमति नहीं है.
उधर एनडीए आरोप लगा रहा है कि इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद के बेटे अभिषेक वर्मा ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई.
एनडीए नेता लालकृष्ण आडवाणी, जसवंत सिंह और जॉर्ज फ़र्नांडिस ने इस सौदे को मनमोहन सिंह सरकार का 'बोफ़ोर्स मामला' बताते हुए कहा, "यह अब तक का सबसे बड़ा सैन्य ख़रीदी घोटाला है, बोफ़ोर्स से भी बड़ा."
एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि स्कोर्पीन पनडुब्बी बेचने वाली फ़्रांसिसी कंपनी थेल्स पर पहले भी आरोप हैं कि उसने दुनिया भर में राजनीतिकों को घूस दी और विश्व बैंक ने इस कंपनी पर रोक भी लगा रखी है.
उन्होंने अभिषेक वर्मा पर भी कई आर्थिक अपराधों में शामिल होने की बात कही और आरोप लगाया कि इस सौदे में 500 से 700 करोड़ रुपयों की दलाली दी गई.