सोमवार, 20 मार्च, 2006 को 07:30 GMT तक के समाचार
बेस्ट बेकरी कांड की मुख्य गवाह रही ज़ाहिरा शेख़ ने सुप्रीम कोर्ट के ही एक फ़ैसले पर पुनर्विचार कर सज़ा कम करने के लिए एक याचिका दायर की है.
इस याचिका में उनको सुनाई गई सज़ा की अवधि और जुर्माने की राशि पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है.
अदालत में बार-बार बयान बदलने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने गत आठ मार्च को ज़ाहिरा शेख को एक साल की जेल और 50 हज़ार रुपए ज़ुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
दूसरी ओर मुंबई की विशेष अदालत ने भी सुप्रीम कोर्ट से दिशा निर्देश मांगे हैं कि ज़ाहिरा शेख को मुंबई की जेल में रखा जाए या फिर गुजरात की जेल में.
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले बेस्ट बेकरी आगज़नी कांड के मामले में मुंबई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को नौ लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
मार्च, 2002 में हुए इस हत्याकांड में दंगाइयों ने 14 लोगों को ज़िंदा जला दिया था जिनमें 12 मुसलमान थे.
ज़ाहिरा शेख की ओर से उनके वकील डीके गर्ग ने याचिका दायर की है.
इस याचिका में कहा गया है कि अदालत की अवमानना के लिए क़ानून में अधिकतम छह महीने की सज़ा का प्रावधान है जबकि ज़ाहिरा को इसके लिए एक साल की सज़ा सुनाई गई है.
इसी तरह क़ानून का हवाला देकर जुर्माने की राशि भी कम करने का अनुरोध किया गया है.
सज़ा और जुर्माना
गत आठ मार्च को जस्टिस अरिजित पसायत और एचके सेमा की खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में ज़ाहिरा को एक साल की जेल और पचास हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
अदालत ने कहा था कि यदि ज़ाहिरा जुर्माना नहीं अदा करती हैं तो उनकी सज़ा एक साल और बढ़ा दी जाए.
अदालत ने आयकर विभाग से कहा था कि वह ज़ाहिरा की संपत्ति और बैंक खातों की जाँच करें.
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को निर्देश दिया कि वह सन 2000 से अब तक ज़ाहिरा शेख की आय के स्रोतों की भी जाँच करे.
बदलती रहीं ज़ाहिरा
ज़ाहिरा शेख के बार-बार बयान बदलने से भी यह मामला चर्चा में रहा है.
पहले इस मामले की सुनवाई वड़ोदरा में हुई थी लेकिन जून, 2003 में गवाहों के अभाव में सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था.
इसके बाद कुछ सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप से मानवाधिकार संगठन ने इस मामले की जाँच की और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को फिर से शुरु करने के निर्देश दिए.
एक जनहित याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि यह मामला गुजरात से बाहर चले और इसे स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी मुंबई की एक विशेष अदालत में सुनवाई करने का फ़ैसला किया.
इस बीच इस मामले की मुख्य गवाह ज़ाहिरा शेख ने कई बार अपने बयान बदले.
आख़िर में अदालत को इसकी भी जाँच करवानी पड़ी और जाँच में पाया गया कि हो सकता है कि ज़ाहिरा शेख़ को प्रलोभन दिया गया हो.