शुक्रवार, 17 मार्च, 2006 को 09:18 GMT तक के समाचार
भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने फ़िल्म अभिनेत्री और राज्यसभा सदस्य जया बच्चन को सदस्यता के अयोग्य क़रार देने की चुनाव आयोग की सिफ़ारिश मान ली है.
चुनाव आयोग का कहना था कि जया बच्चन राज्यसभा सांसद होते हुए भी उत्तर प्रदेश फ़िल्म विकास निगम की चेयरमैन रही हैं जोकि लाभ का पद है इसलिए उनकी राज्य सभा सदस्यता समाप्त कर दी जानी चाहिए.
आयोग ने इस संबंध में जया बच्चन को नोटिस जारी किए थे जिसके बाद जया बच्चन ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया था.
जया बच्चन का कहना है कि चेयरमैन के पद पर रहते हुए उन्होंने वेतन नहीं लिया है इसलिए वो लाभ का पद नहीं है.
चुनाव आयोग को कांग्रेस के एक नेता मदनमोहन शुक्ला की ओर से एक शिकायत मिली थी जिसमें उन्होंने आयोग से जया बच्चन के लाभ के पद पर होने के कारण अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया था.
उलझा मामला
इसी दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक विधेयक पारित किया गया जिसके तहत ऐसे 79 पदों को लाभमुक्त क़रार दिया गया है.
हालांकि यह विधेयक अभी प्रभावी नहीं हो सका है और क्योंकि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने इसे मंज़ूरी नहीं दी है.
जया बच्चन के बाद आयोग ने समाजवादी पार्टी के सांसद और महासचिव अमर सिंह को भी ऐसा ही नोटिस जारी किया गया है.
अमर सिंह राज्यसभा सांसद होते हुए भी उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास बोर्ड के चेयरमैन हैं और इसी कारण उन्हें भी नोटिस दिया गया है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने इसे साजिश करार दिया था और कहा था कि पार्टी इसका जवाब देगी.
संविधान के तहत राष्ट्रपति चुनाव आयोग से विचार विमर्श कर किसी सांसद की योग्यता पर फ़ैसला करता है.