बेस्ट बेकरी कांड की मुख्य गवाह ज़ाहिरा शेख़ ने सेशन कोर्ट में अपील की है कि उन्हें एक वर्ष की कारावास की सज़ा काटने के लिए वडोदरा की जेल में भेजा जाए.
ज़ाहिरा के बार-बार बयान बदलने से नाराज़ अदालत ने उन्हें अवमानना का दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई थी.
अवमानना का दोषी पाए जाने के बाद ज़ाहिरा ने 10 मार्च को आत्मसमर्पण कर दिया था और कहा था कि उन्हें सज़ा महाराष्ट्र में ही काटने दिया जाए क्योंकि गुजरात में उनकी जान को ख़तरा है.
अब छह दिन बाद अपने पिछले बयान से पलटते हुए ज़ाहिरा ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रही है इसलिए उन्हें गुजरात पुलिस के हवाले कर दिया जाए.
विशेष न्यायाधीश अभय थिप्से की अदालत में ज़ाहिरा ने रोते हुए कहा, "ये लोग मुझे मार डालेंगे, ये लोग न तो ढंग का खाना दे रहे हैं और न ही मुझे नमाज़ पढ़ने दे रहे हैं इसलिए मैं वडोदरा जाना चाहती हूँ."
जज ने पुलिस को निर्देश दिए कि ज़ाहिरा शेख़ को नमाज़ पढ़ने और घर का खाना खाने दिया जाए.
ज़ाहिरा शेख़ के बार-बार बयान बदलने से नाराज़ सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई थी इसलिए ज़ाहिरा के पास सज़ा काटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.
ज़ाहिरा शेख़ गुजरात में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी में 14 लोगों को जिंदा जलाए जाने की घटना की मुख्य गवाह हैं.