सोमवार, 13 मार्च, 2006 को 08:11 GMT तक के समाचार
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में जेसिका लाल हत्याकांड में बरी किए गए सभी नौ लोगों को रिहा किए जाने के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जस्टिस एसएल भयाना ने सभी अभियुक्तों को आरोपमुक्त कर दिया था.
अपील में कहा गया है कि इन लोगों को रिहा करना ग़लत है और अभियोग पक्ष ने जो परिस्थितिजन्य सबूत पेश किए थे, उन पर विचार नहीं किया गया.
इस फ़ैसले पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और दिल्ली पुलिस और यहाँ तक कि गृह मंत्री को इस मामले की फिर से जाँच का आश्नासन देना पड़ा था.
दिल्ली पुलिस आयुक्त केके पॉल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस मामले की पुलिस की एक विशेष टीम दोबारा जाँच कर रही है.
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 फ़रवरी को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर पूछा था कि इस मामले की जाँच में क्या ख़ामियाँ थीं.
इस नोटिस के जारी होने के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त केके पॉल ने जेसिका लाल मामले की जाँच करने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय पड़ताल के आदेश दे दिए थे.
मशहूर मॉडल जेसिका लाल की हत्या के मामले पर चली सात वर्ष लंबी सुनवाई के बाद 21 फ़रवरी को सभी नौ अभियुक्त बरी कर दिए गए थे.
कहा जा रहा है कि सबूतों के अभाव में और गवाहों के बदल जाने के कारण ऐसा हुआ.
मामला
जेसिका लाल की जुलाई 1999 में दिल्ली के एक रेस्तराँ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
आरोप था कि हरियाणा के एक मंत्री विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने जेसिका लाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी जबकि उनके अन्य दोस्तों ने सबूत मिटाने की कोशिश की थी.
आरोप में कहा गया था कि मनु शर्मा ने जेसिका लाल की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि जेसिका ने मनु के कहने पर भी उसे शराब परोसने से मना कर दिया था.
इस मामले में मनु शर्मा के अलावा आठ और लोगों पर भी आरोप लगाया गया था जिनमें से एक विकास यादव चर्चित नेता डीपी यादव के पुत्र हैं.