शुक्रवार, 10 मार्च, 2006 को 14:19 GMT तक के समाचार
सलमा ज़ैदी
संपादक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
भारत के दो सौ से ज़्यादा छात्रों से मिलना और बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के बारे में उनके विचार जानना एक बेहद ही सुखद अनुभव रहा.
अभी कुछ महीने पहले ही इंदौर में वेबदुनिया के कार्यालय में समूह के प्रमुख विनय छजलानी जी से बात करते हुए यह बात उठी कि दोनों पार्टनर, यानी बीबीसी हिंदी डॉट कॉम और वेबदुनिया मिल कर कोई आयोजन करें.
"ऑनलाइइन पत्रकारिता की कार्यशालाएँ क्यों नहीं? अब भी भारत के अधिकतर पत्रकारिता संस्थानों में इनके बारे में कुछ नहीं बताया जाता है", मेरा सुझाव था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया.
कुछ दिन के पत्राचार के बाद यह शक्ल उभर कर सामने आई कि शुरुआत वेबदुनिया की कर्मभूमि इंदौर से की जाए और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के बाद भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता संस्थान के बाद अगला पड़ाव दिल्ली हो.
यह भी तय हुआ कि दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जनसंचार संस्थान और भारतीय जनसंचार संस्थान यानी आईआईएमसी के छात्रों से भी रूबरू मिला जाए.
शुरुआत
शुरुआत इंदौर में एक संवाददाता सम्मेलन से हुई और शाम तक सभी स्थानीय टीवी चैनेलों और अगले दिन स्थानीय अख़बारों में यह ख़बर प्रमुखता से प्रकाशित थी.
इंदौर, भोपाल और दिल्ली के यह अनुभव इतने सुखद होंगे इसका अनुमान भी नहीं था.
ऑनलाइन जर्नलिज़्म के कुछ गुर बताने के बाद हमने छात्रों को कुछ विषय दिए जिन पर उन्हें वेबसाइट की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए कॉपी लिखनी थी.
हमने कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले सभी छात्रों को प्रमाणपत्र दिए और उन्हें बताया कि हर संस्थान से तीन सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियाँ हिंदी ऑनलाइन पर प्रकाशित की जाएँगी.
छात्रों के तरह-तरह के सवाल थे, बीबीसी को लेकर और साथ ही इंटरनेट पत्रकारिता के बारे में भी.
इन सवालों और छात्रों की टिप्पणियों से यह पूरा एहसास हो रहा था कि भारतीय विश्विद्यालयों के ये छात्र कितने जागरूक हैं और विषय पर उनकी कितनी पकड़ है.
आमंत्रण
ये कार्यशालाएँ सफल रहीं इसका तो अंदाज़ा था लेकिन इतनी लोकप्रिय हैं यह तब पता चला जब देश के कई अलग-अलग विश्विद्यालयों से हमारे पास निमंत्रण आए कि हम उनके यहाँ भी जाएँ और ऐसे आयोजन करें.
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम और वेबदुनिया टीमों ने इस तरह की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए फ़ैसला किया है कि यह यात्रा यहीं ख़त्म नहीं होगी बल्कि इसके कई अलग-अलग पड़ाव होंगे जिनका फ़ैसला बाद में किया जाएगा.
एक विश्विद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष का यह कहना हमारी एक बड़ी उपलब्धि रहा कि वह इस प्रयोग से इतने प्रभावित हैं कि अगले शैक्षणिक वर्ष से वह अपने संस्थान में ऑनलाइन पत्रकारिता को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने का प्रस्ताव रख रहे हैं.
लेकिन सोने पर सुहागा या यूँ कहूँ कि इस सारे प्रयास को कामयाब बनाता है एक छात्र का यह कथन जिससे मैं अपनी बात समाप्त कर रही हूँ.
उनका कहना था, "अब तक मेरे जीवन का लक्ष्य था इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जाकर टीवी के ज़रिए अपनी पहचान बनाना लेकिन आज के इस आयोजन ने मेरे कैरियर की दिशा ही बदल दी है. अब मेरा ध्येय होगा एक सफल ऑनलाइन पत्रकार बनना".