गुरुवार, 09 मार्च, 2006 को 02:26 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, वाराणसी से
बम धमाकों के बाद उत्तर प्रदेश के शहर वाराणसी में जनजीवन सामान्य होता जा रहा है.
लोग घाटों पर गंगा स्नान के लिए जाने लगे हैं और मंदिरों में एक बार फिर घंटे घड़ियाल सामान्य रूप से गूंजने लगे हैं.
बाज़ारों में दुकानों के शटर खुलने लगे हैं और लोगों की चहल-पहल फिर दिखाई देने लगी है.हालांकि पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम हैं.
दो दिन पहले वाराणसी के संकटमोचन मंदिर और स्टेशन पर हुए बम धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था.
हालांकि इन धमाकों के बाद पूरे देश में कड़ी चौकसी बरती जा रही है और मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त बनाया गया है.
हमले के विरोध में विहिप और भाजपा का उत्तर प्रदेश बंद का आयोजन भी शांतिपूर्ण रहा. इसका असर मुख्य रूप से वाराणसी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहा.
लश्कर पर संदेह
पुलिस ने धमाकों के पीछे चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का हाथ होने का संदेह व्यक्त किया है, और कहा है कि बुधवार को लखनऊ में मुठभेड़ में मारा गया कश्मीरी चरमपंथी संभवत: वाराणसी धमाकों का सूत्रधार था.
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक यशपाल सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि "इसकी पूरी संभावना है कि यह व्यक्ति वाराणसी के हमले में शामिल रहा होगा."
लखनऊ के निकट मारे गए डॉक्टर मजीद को उत्तर प्रदेश में लश्करे तैबा का कमांडर बताया जा रहा है.
हालाँकि उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रमुख ने इस बात की पुष्टि नहीं कि डॉक्टर मजीद को हमले के लिए सीधे ज़िम्मेदार माना जा रहा है.
लेकिन उन्होंने कहा कि " यह बड़ा आतंकवादी था और उसी इलाक़े से आ रहा था इसलिए उसका हाथ होने की पूरी संभावना है."
पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि धमाकों में 14 लोगों के मारे गए और लगभग 115 लोग घायल हुए थे.
वाराणसी में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.