पी.एम.तिवारी
असम से
पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार कहे जाने वाले असम राज्य में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत का मुकाबला इस बार एक अनूठे प्रतिद्वंद्वी से है.
29 वर्षीय महिला उम्मीदवार जान्हवी गोस्वामी असम की बरहमपुर विधानसभा सीट पर प्रफुल्ल कुमार को टक्कर देंगी.
वैसे चुनावी मुकाबले में उम्मीदवार तो होते ही हैं और महिला उम्मीदवारों का मैदान में होना भी कोई नई बात नहीं है.
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जान्हवी के चुनावी मैदान में उतरने में नया और अनूठा क्या है ?
इसमें अनूठी बात ये है कि जान्हवी एचआईवी से ग्रस्त हैं. राज्य में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी ने इस बार जान्हवी को चुनाव में टिकट दिया है. वे संभवत देश की पहली एड्स पीड़ित महिला उम्मीदवार हैं.
हालांकि जान्हवी को टिकट देने पर कांग्रेस में कहीं कहीं विरोध के स्वर भी गूंज रहे हैं. लेकिन जान्हवी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं.
जान्हवी गोस्वामी का कहना है," चुनाव प्रचार के दौरान मैं इस बात पर ज़ोर दूँगी कि शादी से पहले कुंडली मिलाने की बजाय एड्स का परीक्षण ज़रूरी है."
'जागरुकता फैलाना ही मकसद'
जान्हवी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की प्रमुख भी हैं. पति से एड्स की बीमारी मिलने के बाद कुछ दिनों तक तो उनका जीवन बेहद उथल-पुथल के दौर से गुज़रा.
जान्हवी ने वर्ष 1994 में एक धनी परिवार में शादी की थी.
अपने जीवन के बारे में बताते हुए जान्हवी कहती हैं, ‘शादी के बाद मेरे पति लगातार बीमार रहते थे. दो साल बाद ही पति की मौत हो गई.’
लेकिन तब तक वे अपनी पत्नी को भी यह बीमारी दे चुके थे.
जान्हवी बताती है कि ‘मरने के कुछ दिनों पहले पति ने बताया था कि किसी महिला के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण ही वे एड्स की चपेट में आए थे.’
दो साल बाद बीमारी के कारण जान्हवी की दो साल की बेटी की भी मौत हो गई.
इसके बाद जान्हवी ने इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया. वे कहती हैं कि ‘शादी के पहले एड्स की जाँच करवाना ज़रूरी कर देना चाहिए.’
कांग्रेस की सदस्यता
बीते सप्ताह शनिवार को जान्हवी ने औपचारिक तौर पर कांग्रेस की सदस्यता ली. इसके बाद उनको प्रफुल्ल कुमार महंत के ख़िलाफ़ उम्मीदवार बनाने का एलान कर दिया गया.
असम की राजधानी गुवाहाटी के पास रहने वाली जान्हवी अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत के प्रति काफ़ी उत्साहित हैं.
उनको टिकट देने वाली कांग्रेस पार्टी के ज़्यादातर लोग भी कम उत्साहित नहीं है. प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्त ए.बोरा कहते हैं, ‘जान्हवी एक साहसी महिला है, वे पार्टी के लिए काफ़ी उपयोगी साबित होंगी.’
जान्हवी के प्रतिद्वंद्वी प्रफुल्ल कुमार महंत ने बीते साल असम गण परिषद (अगप) से निकाले जाने के बाद बीते साल अगप (प्रोग्रेसिव) नामक नई पार्टी का गठन किया था.
वे वर्ष 1985 यानी अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत से ही बरहमपुर सीट जीतते आए हैं.