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मंगलवार, 07 मार्च, 2006 को 14:54 GMT तक के समाचार

पहले भी मंदिरों पर हुए हैं हमले

भारत के वाराणसी शहर में संकटमोचन मंदिर में एक ज़ोरदार बम धमाका हुआ है जिसमें अनेक लोग हताहत हुए हैं.

ये पहला मौका नहीं है कि जब भारत में मंदिरों को चरमपंथी हमलों का निशाना बनाया गया है.

पिछले वर्ष यानी 2005 में अयोध्या में विवादित मंदिर-मस्जिद परिसर के पास कुछ संदिग्ध चरमपंथियों ने हमला किया था.

लेकिन इस हमले को सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया था.

सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पाँच चरमपंथी मारे गए थे. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे आत्मघाती हमला बताया था.

अक्षरधाम मंदिर

इससे पहले वर्ष 2002 में 24 सितंबर को गुजरात के गाँधीनगर में अक्षरधाम मंदिर पर भी हमला किया गया था. हमले में 33 लोग मारे गए थे.

चरमपंथी अक्षरधाम मंदिर के अंदर घुस गए थे और उनके पास एके-47 राइफ़लें थी और चरमपंथियों ने लोगों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईँ थी.

इसके बाद दिल्ली से आए एनएसजी कमांडो दस्ते और चरमपंथियों के बीच रात भर चली मुठभेड़ चली थी. जिसके बाद कमांडो दस्ते ने सुबह चरमपंथियों को मार डाला था.

इस हमले में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के दो जवान, गुजरात विशेष बल का एक जवान और 28 श्रद्धालु भी मारे गए थे.

वर्ष 2003 में भारतीय सुरक्षाबलों ने कहा था कि उन्होंने अक्षरधाम मंदिर पर हमले की योजना बनाने में अहम भूमिका निभानेवाले लश्करे तैबा के कमांडर अबू उमेर को भारत प्रशासित कश्मीर में हुई एक मुठभेड़ में मार दिया है.

करोड़ों रूपए की लागत से बना अक्षरधाम मंदिर, पंथ के संस्थापक प्रभु स्वामीनारायण को समर्पित है.

रघुनाथ मंदिर

वर्ष 2002 में ही नवंबर माह में जम्मू के रघुनाथ मंदिर पर हुए हमला किया गया. इस हमले में दो इस्लामी चरमपंथियों सहित 11 लोग मारे गए थे.

चरमपंथियों ने रघुनाथ मंदिर के अलावा पास के शिव मंदिर पर भी हमला किया था.

हमले में कई श्रद्धालुओं समेत करीब 50 लोग घायल हो गए थे.

सुरक्षा बलों को शिव मंदिर को चरमपंथियों से मुक्त कराने के लिए रॉकेट लांचरों का उपयोग करना पडा था.

रघुनाथ मंदिर हिंदुओं के आराध्य राम का मंदिर है.

इसी साल मार्च में भी चरमपंथियों ने रघुनाथ मंदिर पर हमला कर आठ लोगों को मार डाला था.