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शनिवार, 04 मार्च, 2006 को 13:25 GMT तक के समाचार

ईरान से गैस पाइपलाइन को हरी झंडी

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने बुश ने कहा है कि उन्हें ईरान से आने वाली उस गैस पाइप लाइन पर कोई आपत्ति नहीं है जिससे पाकिस्तान और भारत को गैस आपूर्ति होने का प्रस्ताव है.

इससे पहले अमरीका इस गैस पाइप लाइन पर आपत्ति करता रहा है और बुश के इस बयान को अमरीका के रुख़ में परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है.

(बुश ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोग के लिए मुशर्रफ़ की पीठ थपथपाई)

बुश ने कहा, "ईरान के साथ हमारा विवाद गैस पाइप लाइन पर नहीं है, हमारी चिंता ये है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता हैं और मेरा मानना है कि ईरानियों के हाथ में परमाणु हथियार बेहद ख़तरनाक साबित हो सकते हैं."

जॉर्ज बुश ने कहा, "परवेज़ मुशर्रफ़ ने यह मुद्दा उठाया कि पाकिस्तान को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की ज़रूरत है, उन्होंने देश में गैस की उपलब्धता के हालात बताए, और मैं समझता हूँ कि इसमें कोई ऐतराज़ नहीं है."

बुश ने कहा कि दक्षिण एशिया क्षेत्र को गैस की ज़रूरतों को वह समझते हैं.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही ईरान से गैस आपूर्ति के लिए छह करोड़
डॉलर का लागत वाली पाइप लाइन बिछाने पर बातचीत कर रहे हैं.

इससे पहले अमरीका कहता रहा है कि वह इस गैस पाइप लाइन का विरोध करता है और अगर इसके बावजूद भारत और पाकिस्तान ने इस परियोजना को आगे बढ़ाया तो उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

परमाणु सहमति

बुश ने असैनिक परमाणु कार्यक्रम के बारे में कहा है कि पाकिस्तान के साथ वैसी ही असैनिक परमाणु सहमति नहीं हो रही है जैसी कि भारत के साथ की गई है.

बुश ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की ज़रूरतें अलग-अलग हैं इसलिए दोनों के एक साथ एक जैसी सहमति या समझौते नहीं हो सकते.

बुश से सवाल पूछा गया कि जिस तरह की परमाणु सहमति भारत के साथ की गई है क्या उसी तरह की सहमति पाकिस्तान के भी साथ हो सकती है.

बुश ने कहा भारत और पाकिस्तान भिन्न देश हैं जिनकी अलग-अलग ज़रूरतें और इतिहास हैं.

कश्मीर

राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ कश्मीर मसले पर भी बातचीत की है और इसका कोई भी हल भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए ही संभव है.

ग़ौरतलब है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने बुश की दक्षिण एशिया यात्रा शुरू होने से पहले कहा था कि वह चाहते हैं कि बुश कश्मीर मसले का समाधान निकलवाने के लिए मध्यस्थता करें.

इस्लामाबाद में एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बुश के इस बयान से राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को निराशा हो सकती है जो कश्मीर मसले के समाधान के लिए बुश की सक्रिय भूमिका की उम्मीद लगा रहे थे.

हालाँकि बुश ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए हाल के समय में शुरू किए गए प्रयासों की सराहना की.