बुधवार, 01 मार्च, 2006 को 13:14 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अफ़ग़ानिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की प्रगति की तारीफ़ करते हुए कहा है कि यह दूसरे देशों के लिए प्रेरणा स्रोत है.
राष्ट्रपति बुश ने बुधवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुँचने से पहले अचानक अफ़ग़ानिस्तान का दौरा किया.
इस यात्रा के दौरान बुश ने राजधानी काबुल में अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात की और संयुक्त रूप से एक पत्रकारों को संबोधित भी किया.
यह उनकी पहली अफ़ग़ानिस्तान यात्रा है और इसे अघोषित रखा गया था.
बुश ने भरोसा जताया कि अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन को न्याय के कटघरे में ज़रूर लाया जाएगा.
बीबीसी संवाददाता जॉन बीयल का कहना है कि बुश की यह पहली अफ़ग़ानिस्तान यात्रा तालेबान शासन की समाप्ति के लगभग चार साल बाद हुई है.
बियल के अनुसार बुश की काबुल यात्रा को जिस तरह गुप्त रखा गया और उसके लिए जो अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए गए उससे यही नज़र आता है कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने के लिए जो प्रयास चल रहे हैं वे अभी पूरे होने से काफ़ी दूर हैं.
अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के साथ पत्रकार सम्मेलन में बुश से अल क़ायदा नेताओं की तलाश के बारे में भी सवाल पूछे गए.
बुश ने विश्वास व्यक्त किया कि ओसामा बिन लादेन और तालेबान नेता मुल्ला उमर को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं कि उन्हें न्याय के कटघरे में लाया भी जाएगा यह नहीं, सवाल बस ये है कि ऐसा कब होगा.
लेकिन बुश की काबुल यात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति हामिद करज़ई को अमरीका का समर्थन और एकजुटता दिखाना था.
जॉर्ज बुश ने यह स्पष्ट किया कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना की मौजूदगी दोनों देशों की आपसी सहमति से है.
उन्होंने कहा कि अमरीका उन लोगों का समर्थन करना चाहता है जो स्वतंत्रता की हिमायत करते हैं.
काबुल से राष्ट्रपति जॉर्ज बुश तीन दिन की भारत यात्रा के लिए दिल्ली के लिए रवाना हो गए जहाँ दोनों देशों के बीच परमाणु समझौता होने की संभावना है.
राष्ट्रपति बुश पहले ही कह चुके हैं कि दोनों देशों के बीच अभी यह समझौता नहीं हुआ है.
कड़ी सुरक्षा
काबुल में बुधवार को भारी सुरक्षा रही और अनेक हेलीकॉप्टर उड़ान भरते देखे गए. साथ ही अमरीकी सैन्य जीप भी सड़क पर असाधारण रूप से दौड़ती देखी गईं जिनमें अमरीकी सैनिक नज़र आए.
ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान चला रही बहुदेशीय सेनाओं का नेतृत्व अमरीकी सैनिक करते हैं.
अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में तैनात हैं.
अफ़ग़ानिस्तान पर अक्तूबर 2001 में विदेशी गठबंधन के हमले के बाद तालेबान प्रशासन को हटा दिया गया था और हामिद करज़ई के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी.
तभी से हामिद करज़ई अमरीका के निकट सहयोगी रहे हैं.
पिछले चार साल के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य अभियानों में लगभग 200 अमरीकी सैनिक मारे जा चुके हैं.
चरमपंथियों ने 2005 में अपने हमले तेज़ कर दिए थे और तालेबान शासन की समाप्ति के बाद से हालात काफ़ी हिंसक हो गए थे.
एक अमरीकी सैन्य ख़ुफ़िया अधिकारी ने मंगलवार को वाशिंगटन में अमरीकी कांग्रेस को सूचित किया कि 2005 में अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई.