मंगलवार, 28 फ़रवरी, 2006 को 09:14 GMT तक के समाचार
छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग से एक ट्रक उड़ा दी है जिसमें 25 आदिवासियों की मौत हो गई है और कई गंभीर रुप से घायल हुए हैं.
पहले मरने वालों की संख्या 50 बताई गई थी लेकिन अब अधिकारियों ने कहा है कि 25 लोगों की मौत हुई है.
ये आदिवासी नक्सलियों के ख़िलाफ़ सरकार के सहयोग से चल रहे आंदोलन सलवा जुड़ूम में भाग लेकर लौट रहे थे.
हमला मंगलवार की सुबह 11 बजे के बाद हुआ और यह बस्तर में यह अब तक का सबसे बड़ा नक्सली हमला है.
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इसे लेकर एक आपात बैठक बुलाई है जिसमें गृहमंत्री रामविचार नेताम और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी राठौर के अलावा कई आला अधिकारी भाग ले रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि नक्सली सलवा जुड़ूम का विरोध कर रहे हैं और गृहमंत्री रामविचार नेताम ने सोमवार को विधानसभा में कहा था कि नक्सलियों ने सोमवार तक 95 आदिवासियों को मार दिया था.
वैसे बस्तर में इसी महीने नक्सली हमले में 35 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें 22 पुलिस कर्मी हैं.
जिस इलाक़े में ये हमला हुआ है वहाँ पिछले कुछ दिनों से एनएसजी (नेशनल सेक्युरिटी गार्ड) को तैनात किया गया है.
दो दिनों पहले ही सरकार ने दावा किया था कि इस इलाक़े में नक्सलियों की संचार व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया गया है.
घटना
ख़बरें हैं कि मंगलवार की सुबह बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा ज़िले में दरभागुड़ा गाँव के पास नक्सलियों ने बारूदी सुरंग से विस्फोट किया और एक ट्रक को उड़ा दिया.
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इन ट्रक में सवार बहुत से आदिवासियों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई.
मृतकों की संख्या 50 से अधिक बताई गई है. आशंका है कि मृतकों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है.
ख़बरें हैं कि नक्सलियों ने साथ में चल रहे दो और ट्रकों में सवार आदिवासियों का अपहरण कर लिया है.
मरने वाले आदिवासी तीन्कोंडा, ढोढरा, पंचमगुड़ा और कोंटा के रहने वाले थे और दोरनापाल से सलवा जुड़ूम आंदोलन के एक कार्यक्रम से कोंटा की ओर लौट रहे थे.
इससे पहले सोमवार को नक्सलियों ने पोलमपल्ली गाँव में सभी सरकारी दफ़्तरों में आग लगा दी है.
सलवा जुड़ूम
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के ख़िलाफ़ एक आंदोलन चल रहा है जिसे सलवा जुड़ूम का नाम दिया गया है, इसका अर्थ होता है जन आंदोलन.
बस्तर के दंतेवाड़ा ज़िले में चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व विपक्ष के नेता महेंद्र कर्मा कर रहे हैं और सरकार ने इसके समर्थन में अपनी पूरी ताक़त लगा रखी है.
इस आंदोलन के चलते कई हज़ार आदिवासियों को उनके गाँवों से निकालकर सड़क के किनारे शिविरों में रखा गया है.
इन आंदोलन का विरोध कर रहे नक्सलियों ने जवाबी कार्रवाई में आदिवासियों और पुलिसकर्मियों पर हमला तेज़ कर दिया है. पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों ने कम से कम 95 आदिवासियों की हत्या की है.
इस आंदोलन का कुछ मानवाधिकार संगठनों और बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है.