सोमवार, 27 फ़रवरी, 2006 को 15:35 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की इस माँग को नामंज़ूर कर दिया है कि भारत अपने देसी फ़ास्ट ब्रीडर परमाणु कार्यक्रम पर कुछ रोक लगाए.
संसद में एक बयान में प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश की परमाणु स्वायत्तता को दाँव पर नहीं लगाया जाएगा.
प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि असैनिक परमाणु सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में रखने के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम तय किया जाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सैनिक और असैनिक परमाणु सुविधाओं को अलग-अलग करने की प्रस्तावित योजना परमाणु सिद्धांत के दायरे में ही तैयार की जाएगी.
उन्होंने कहा कि देश के कौन से परमाणु ठिकाने असैनिक परमाणु सुविधाएँ हैं इस बारे में फ़ैसला सिर्फ़ भारत सरकार ही करेगी और इसमें किसी अन्य देश का कोई दखल नहीं होगा.
प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हम अपने देसी फ़ास्ट ब्रीडर परमाणु कार्यक्रम पर कोई बाहरी निगरानी स्वीकार नहीं कर सकते."
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के भारत यात्रा के दो दिन पहले और इस प्रस्तावित सहयोग कार्यक्रम को लेकर जताई जा रही चिंता के मद्देनज़र इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत और अमरीका के बीच पिछले साल जुलाई में इस सहयोग कार्यक्रम को लेकर सहमति हुई थी लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद भी कुछ मसले अटके हुए हैं, ख़ासकर कुछ परमाणु संयंत्रों को असैनिक संयंत्रों की सूची में लाने का मसला.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी शनिवार को एक साक्षात्कार में कहा था कि परमाणु सहयोग को लेकर दोनों पक्ष के बीच रास्ता अभी साफ़ नहीं हुआ है.
विवाद
भारत में राजनीतिक दलों को आशंका है कि सरकार इस समझौते को लेकर अमरीकी दबाव में आ रही है.
वहीं परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख काकोडकर सहित कई वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को असैन्य संयंत्र घोषित करके इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के लिए खोल देना उपयुक्त नहीं होगा.
अमरीका चाहता है कि इन संयंत्रों को असैनिक घोषित कर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षण के लिए खोल देना चाहिए.
भारत ने कहा है कि इस समझौते में देश हित को सर्वापरि रखा जाएगा.
उल्लेखनीय है कि पिछले गुरुवार को अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने विदेश सचिव श्याम सरन से चर्चा की थी लेकिन वे भी किसी सहमति पर नहीं पहुँच पाए थे.
इससे पहले अमरीका ने परमाणु सहमति को ईरान पर भारत के रुख़ से जोड़ने की कोशिश की थी लेकिन भारत के ईरान के ख़िलाफ़ वोट देने के बाद यह रास्ता साफ़ हो गया था.