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सोमवार, 27 फ़रवरी, 2006 को 15:11 GMT तक के समाचार

चरख़ी जेल के क़ैदियों से बातचीत

अफ़ग़ानिस्तान के न्याया उपमंत्री मोहम्मद क़ासिम हाशिमज़ई ने कहा है कि शनिवार को जिस जेल में हिंसा शुरू हो गई थी उसे रोकने के लिए अगर ज़रूरी हुआ तो बल प्रयोग भी किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि क़ैदियों के साथ बातचीत चल रही है और सरकार शांतिपूर्ण हल निकालना चाहती है.

राजधानी काबुल की पुल-ए-चरख़ी नामक जेल को सशस्त्र सुरक्षा बलों ने चारों ओर से घेर लिया है. इस जेल में 1300 से ज़्यादा क़ैदी हैं जिनमें तालेबान और अल क़ायदा के कुछ लड़ाके भी शामिल हैं.

इस बीच जेल के क़ैदियों ने वहाँ के कुछ हिस्सों पर क़ब्ज़ा करने के बाद अपनी मांगों की एक सूची जारी की है.

क़ैदी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करना चाहते हैं और बेहतर भोजन के अलावा जेल के वर्दी क़ानून में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं.

राजधानी काबुल में स्थित पुल-ए-चरख़ी जेल के अंदर दंगों की शुरूआत शनिवार को हुई और एक मानवाधिकार संगठन के पदाधिकारी ने इन दंगों में चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. 36 घायल भी हुए हैं.

जेल के अधिकारी इससे इनकार करते हैं और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह मौतें किस तरह हुईं.

घेराबंदी

दंगों के चौबीस घंटों के बाद भी सुरक्षा बलों ने जेल के चारों ओर घेरा डाल रखा है.

अधिकारियों का कहना है कि इन दंगों में तालेबान और अल क़ायदा के सदस्यों के अलावा साधारण अपराधी भी शामिल हैं. उनका कहना है इन क़ैदियों के पास हथियारों के नाम पर चाकू और कामचलाऊ मुगदर हैं लेकिन बंदूकें नहीं हैं.

शनिवार और रविवार की रात को जेल के अंदर से बंदूकें चलने की आवाज़ भी सुनाई दी लेकिन सोमवार को माहौल शांत नज़र आ रहा था.

जेल के बाहर मौजूद बीबीसी के स्थानीय संवाददाता बिलाल सरवरी का कहना है कि सोमवार को दो बार बंदूक चलने की आवाज़ आई और सुरक्षाकर्मियों की संख्या भी कम थी.

बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि सैकड़ो क़ैदी अब भी महिलाओं वाली जेल में घुसे हुए हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें डर है कि कुछ क़ैदियों ने वहाँ बंद महिला क़ैदियो के साथ बलात्कार भी किया हो.

इस दंगे की शुरूआत शनिवार की शाम में हुई जब जेल के ब्लॉक नंबर दो में बंद 1300 क़ैदियों ने जेल की वर्दी के क़ानून में आए बदलावों का विरोध करना शुरू किया.

अफ़गान जेल के निदेशक जनलर सलाम बख़्शी ने बीबीसी को बताया, "ये अल क़ायदा और तालेबान का काम है. हिंसा भड़का कर वो जेल से फ़रार होना चाहते हैं. लेकिन अभी तक किसी को सफलता नहीं मिली है."

पुल-ए-चरख़ी काबुल के बाहर बना हुआ एक बहुत बड़ा जेल है और ये सत्तर के दशक में बना था.