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रविवार, 26 फ़रवरी, 2006 को 22:23 GMT तक के समाचार

'क्लिंटन ने कहा था शरीफ़ को फाँसी नहीं'

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने अपने शासनकाल में तब के पाकिस्तानी राष्ट्रपति से कहा था कि नवाज़ शरीफ़ को फाँसी नहीं होनी चाहिए.

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने अपने निर्वासन में जाने के हालात पर से पर्दा उठाते हुए, लंदन में बीबीसी उर्दू सेवा के साथ विशेष बातचीत में, अमरीका की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए ये कहा है.

उनका कहना था, "बिल क्लिंटन हमदर्दी रखते थे. जब वे डेढ़ साल पहले जेद्दा आए तो मेरी उनसे मुलाकात हुई थी. जो उन्होंने मुझे बताया, उसमें से केवल इतना बता सकता हूँ कि उस समय उन्होंने अपनी नाराज़गी शायद जनरल मुशर्रफ़ तक भी पहुँचाई थी."

उनका कहना था, "उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति रफ़ीक़ तारिर से बिल क्लिंटन ने कहा था कि नवाज़ शरीफ़ को फ़ाँसी नहीं होनी चाहिए."

करगिल पर सफ़ाई

करगिल के संबंध में उन्होंने कहा, "मैने करगिल के बारे बहुत सबर और हिम्मत के साथ बहुत सारी बातें अपने सीने में दफ़न की हैं. अच्छा होगा कि ये बातें बाहर न निकलें. जब पाकिस्तान के साथ-साथ और देशों को भी ये पता चलेगा तो पाकिस्तानी फ़ौज की बदनामी होगी और देश की बदनामी होगी. मैने ये सब चीज़ें ख़ुद पर ले ली हैं."

उनका कहना था, "मुझे नहीं पता था कि ऐसा हो रहा है. मुझे तब पता चला जब मुझे प्रधानमंत्री वाजपेयी का फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि नवाज़ शरीफ़ साहब मैं तो दोस्ती का हाथ बढ़ाने पाकिस्तान आया था लेकिन आपने तो पीठ में छुरा घोंप दिया. हम तो 1999 में ही कश्मीर का मुद्दा हल करना चाहते थे, ये आपने क्या किया. जब मैने पता किया तो ये बात सच थी."

'कोई सौदा नहीं'

जब उन पर अपने समर्थकों को निराश कर निर्वासन में चले जाने की बात उठी तो उनका कहना था, "मैं 14 माह जेल में रहा और मुझे कई जगह रखा गया. मैने कोई समझौता या सौदा नहीं किया. न मेरा जनरल मुशर्फ़ से कोई संपर्क था और उन्होंने किया भी होता तो मैं कोई समझौता न करता."

नवाज़ शरीफ़ का कहना था, "पाकिस्तान फ़ौज के तीन जनरल मेरे पास आए थे और उन्होंने कहा था कि आप इन काग़ज़ों पर हस्ताक्षर कर दें और फिर आप आज़ाद हैं, जहाँ मर्ज़ी जाएँ लेकिन मैने ये नहीं माना. सौदेबाज़ी ही करनी थी तो मुझे जेल भुगतने की ज़रूरत क्या थी."

उनका कहना था, "मुझे जेल में शक था कि शायद मृत्युदंड दिया जा सकता है. फिर 72 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई और सरकार ने अपील की कि जेल की सज़ा को मृत्युदंड में बदल दिया जाए लेकिन ये अपील नामंज़ूर हो गई. मैं घबराया नहीं हुआ था सरकार ज़्यादा घबराई हुई थी."

उनका कहना था, "सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने ख़ुद ही जनरल मुशर्रफ़ से संपर्क किया और उन्होंने सोचा कि हमारा एक भाई है जिसे हथकड़ियाँ लगाई जा रही हैं और जेल में बंद किया जा रहा है और फिर देश से बाहर जाना और ये निर्वासन हुआ.."

उन्होंने पाकिस्तान से संबंधित कई अन्य मुद्दों पर भी श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए.