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बुधवार, 01 मार्च, 2006 को 13:48 GMT तक के समाचार

'परमाणु मसले पर अभी सहमति नहीं'

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अपनी भारत यात्रा के दो दिन पहले संकेत दिए हैं कि परमाणु मसले पर भारत और अमरीका के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है.

उन्होंने कहा है कि परमाणु ऊर्जा एक कठिन मसला है और इस पर अभी और काम करने की ज़रुरत है और उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच कोई हल ज़रुर निकल आएगा.

पहली मार्च को भारत पहुँच रहे राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि इस यात्रा के दौरान पाकिस्तान जाकर वे 'आतंकवादी प्रशिक्षण कैंपों' को नष्ट करने का मामला उठाएँगे.

जॉर्ज बुश ने भारत के सरकारी टेलीविज़न दूरदर्शन को वॉशिंगटन में दिए गए एक साक्षात्कार में कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने लोगों को समझाना होगा कि सैन्य परमाणु कार्यक्रम से असैनिक परमाणु कार्यक्रम को अलग करना होगा.

उल्लेखनीय है कि दोंनों देशों के बीच भारत में विकसित परमाणु संयंत्रों को असैनिक संयंत्रों की सूची में रखने न रखने को लेकर असहमति है.

पिछले दिनों अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने भारत के विदेश सचिव श्याम सरन से इस विषय में चर्चा की थी लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी.

पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमरीका यात्रा के दौरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक सहमति बनी थी और अब प्रयास किए जा रहे हैं कि बुश की भारत यात्रा के दौरान इस समझौते को अंतिम रुप दे दिया जाए.

कश्मीर

भारत के बाद पाकिस्तान की यात्रा की योजना के साथ आ रहे राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि वे के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सामने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 'आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविरों' को नष्ट करने का मसला भी उठाएँगे.

उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को रोचक मोड़ पर बताते हुए कहा कि एक समय था जब अमरीका पाकिस्तान के ज़्यादा क़रीब था लेकिन अब दोनों देशों से अच्छे रिश्ते हैं.

उधर समाचार एजेंसियों ने पाकिस्तान टेलीविज़न के हवाले से ख़बर दी है कि अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा है कि कश्मीर के मसले पर अमरीका की एक भूमिका है.

उल्लेखनीय है कि भारत कश्मीर के मसले पर किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं करता लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पिछले दिनों एक बार फिर दोहराया था कि कश्मीर पर अमरीका को मध्यस्थता करनी चाहिए.