शनिवार, 25 फ़रवरी, 2006 को 04:16 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि ‘नया कश्मीर’ बनाने के लिए कश्मीरी नेताओं के सहयोग की ज़रूरत है.
कश्मीर मसले पर दिल्ली में रविवार को गोलमेज़ सम्मेलन हुआ.
सम्मेलन में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने चुनावी प्रणाली के बाहर जाकर राजनीतिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला शुरू किया है.
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने बातचीत की प्रकिया में कश्मीर के अलगाववादी धड़े हुर्रियत कांफ़्रेस को भी शामिल किया है.
मनमोहन सिंह का कहना था, "मैने कई बार बोला है कि मैं निजी स्तर पर ऐसे किसी भी व्यक्ति से मिलने को तैयार हूँ जो हिंसा की बात न करता हो."
'सशक्तिकरण'
मनमोहन सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न घटनाओं में कश्मीरी नागिरकों का मारा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है पर सुरक्षा बलों की मंशा लोगों को मारने की नहीं थी.
मनमोहन सिंह ने कहा कि कश्मीरी लोगों को सशक्त करना बेहद ज़रूरी है.
उन्होंने कहा कि सुशासन के दायरे में रहते हुए सुरक्षा का एहसास लोगों को सशक्त कर सकता है.
भारतीय प्रधानमंत्री का कहना था कि जो लोग दिल्ली में हुई बातचीत में शामिल नहीं हैं वो भी इसमें हिस्सा लेंगे जब उन्हें विचारों के आदान प्रदान की अहमियत समझ में आएगी.
कश्मीर के अलगाववादी संगठनों ने बातचीत के निमंत्रण को ठुकरा दिया था. इसमें हुर्रियत कॉफ़्रेस के दोनों धड़े शामिल हैं.
निमंत्रण ठुकराया
दिल्ली में कश्मीर पर हुई बैठक में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद, नेशनल कांफ़्रेस अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ़्ती समेत कई लोगों ने हिस्सा लिया.
दिल्ली में सबसे पहले हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने निमंत्रण ठुकराया था.
इसके बाद जेकएलएफ़ के यासीन मलिक और अन्य अलगाववादी नेता शब्बीर शाह ने भी इसे ठुकरा दिया.
हुर्रियत के उदारवादी गुट के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूख़ भी इससे पीछे हट गए. उनका कहना था कि बैठक के लिए यह उपयुक्त समय नहीं है. उनका कहना था कि इस बातचीत से किसी तरह का कोई निष्कर्ष नहीं निकल सकता.
उन्होंने कहा कि ऐसी किसी बैठक से पहले भारत व पाकिस्तान और भारत सरकार और कश्मीरी नेताओं के बीच हो रही वार्ताओं का कोई निष्कर्ष निकलना ज़रूरी है.