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बुधवार, 22 फ़रवरी, 2006 को 01:59 GMT तक के समाचार

श्रीलंका सरकार और विद्रोहियों की वार्ता

श्रीलंका के अधिकारी और तमिल विद्रोहियों के नेता स्विट्ज़रलैंड के शहर जिनेवा पहुँच गए हैं जहाँ वे तीन वर्षों के अंतराल के बाद आमने-सामने बैठकर बातचीत करेंगे.

बुधवार से शुरू हो रही दो दिनों की बातचीत का उद्देश्य चार वर्ष से चले आ रहे युद्धविराम को और मज़बूत बनाना है.

पिछले कुछ महीनों में श्रीलंका में हुई हिंसा की घटनाओं के बाद युद्धविराम के टूटने की आशंका व्यक्त की जाने लगी थी, दोनों पक्ष इस स्थिति के लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे थे.

नॉर्वे के विशेष दूत इस बातचीत की मध्यस्थता कर रहे हैं, वर्ष 2002 में उनकी मध्यस्थता के बाद ही युद्धविराम का समझौता हो सका था.

युद्धविराम के बाद दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कई दौर की बातचीत हुई थी लेकिन वर्ष 2003 में यह प्रक्रिया ठप पड़ गई थी जिसे अब दोबारा शुरू किया जा रहा है.

जिनेवा की बैठक में भाग ले रहे श्रीलंका सरकार के वरिष्ठ अधिकारी अजित निवार्ड ने कहा है, "हम खुले दिमाग़ के साथ बातचीत करने जा रहे हैं, हम चाहते हैं कि युद्धविराम अर्थपूर्ण हो और लोगों के मारे जाने का सिलसिला रूके."

हिंसा

पिछले वर्ष नवंबर में महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति बनने के बाद देश में हिंसा की नई लहर पैदा हो गई है जिसमें अब तक 120 लोग मारे जा चुके हैं, इनमें से 80 श्रीलंका के सैनिक हैं.

ज़्यादातर सैनिक बारूदी सुरंगों के धमाकों में मारे गए हैं और श्रीलंका की सरकार इसके लिए तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराती है लेकिन विद्रोही इन आरोपों को ग़लत बताते हैं.

तमिल विद्रोहियों का कहना है कि तीन महीनों में उनके 40 साथी सुरक्षा बलों के हाथों मारे जा चुके हैं, श्रीलंका की सरकार का कहना है कि तमिल विद्रोह अपने ही अलग-अलग गुटों के संघर्ष में मारे गए हैं.

उम्मीद की जा रही है कि दो दिन की बातचीत में दोनों पक्षों के बीच इस बात पर सहमति हो सकेगी कि युद्धविराम को अधिक कारगर किस तरह बनाया जाए ताकि दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव को टाला जा सके.

श्रीलंका में दो दशकों से चल रहे टकराव में अब तक 60 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.