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रविवार, 19 फ़रवरी, 2006 को 17:17 GMT तक के समाचार

लखनऊ में प्रदर्शन, लाखों शामिल

पैगंबर मोहम्मद का मखौल उड़ाने वाले कार्टूनों के विरोध में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी रविवार को प्रदर्शन निकाला गया जिसमें लाखों मुसलमानों ने हिस्सा लिया.

प्रदर्शनकारी माँग कर रहे थे कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापने के लिए डेनमार्क सरकार माफ़ी माँगे, साथ ही उन्होंने भारत सरकार से माँग की कि वह डेनमार्क के साथ सभी राजनयिक संबंध तोड़ ले और डेनमार्क में अपने राजदूत को वापिस बुला ले.

इस प्रदर्शन का आयोजन शिया और सुन्नी धार्मिक नेताओं ने मिलकर किया था और इसमें भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शन का नेतृत्व शिया नेता मौलाना कल्बे जव्वाद और सुन्नी नेता मौलाना फ़ज़लुर्रहमान वैज़ी नदवी ने किया.

नाराज़ प्रदर्शनकारियों ने एक होटल और कुछ दुकानों को भी नुक़सान पहुँचाया, हवा में फ़ायर किए और पटाख़े जलाए.

प्रदर्शनकारियों ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के दर्जन भर पुतले भी जलाए. जुलूस के दौरान लाखों मुसलमान पुराने शहर में आसफ़ी इमामबाड़े में इकट्ठा हुए और वहाँ से राज्य विधान मंडल की इमारत की तरफ़ मार्च किया जो हज़रतगंज बाज़ार के निकट है.

क़रीब चार किलोमीटर की दूरी तय करने वाले इस जुलूस के दौरान लोगों ने हाथों में हरे रंग के झंडे पकड़े हुए थे जिन पर चाँद बना हुआ था.

कुछ तख़्तियों पर पैगंबर मौहम्मद के कार्टून बनाने वालों, अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और यहूदियों के प्रति ग़ुस्सा जताने वाले नारे भी लिखे थे.

एक समय प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण करना मुश्किल हो गया और भीड़ ने नारेबाज़ी जारी रखी.

ग़ुस्साई भीड़ को संबोधित करते हुए मौलाना कल्बे जव्वाद ने घोषणा की कि मुसलमान अब पेप्सी कोला और कोका कोला शीतल पेयों का बहिष्कार करेंगे. उनका कहना था कि इन शीतल पेयों की बिक्री से यहूदियों को मज़बूती मिलती है और इससे फ़लस्तीनियों के दमन में इसराइल को मदद भी मिलती है.

कुछ वक्ताओं ने तो यहाँ तक माँग कर डाली कि राष्ट्रपति बुश को अपनी आगामी भारत यात्रा हद्द कर देनी चाहिए.

इस मौक़े का इस्तेमाल ईरान मुद्दे पर भारत सरकार के रुख़ पर नाराज़गी जताने के लिए भी किया गया.