गुरुवार, 16 फ़रवरी, 2006 को 15:13 GMT तक के समाचार
फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने कहा है कि दोनों देश असैनिक परमाणु सहयोग के काफ़ी क़रीब हैं लेकिन अभी दोनों पक्षों को 'काफ़ी कुछ काम' करने की ज़रूरत है.
ज़्याक शिराक ने यह बात ऐसे मौक़े पर कही है जब वह कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा पर आने वाले हैं.
शिराक ने भारतीय समाचार पत्रिका इंडिया टुडे के साथ एक ख़ास बातचीत में यह भी कहा है कि भारत को परमाणु सामग्री की आपूर्ति करने वाले देशों के गुट एनएसजी में मान्यता दिलाना फ्रांस के लिए प्राथमिकता का काम है.
शिराक 19 फ़रवरी को भारत की तीन दिन की यात्रा पर राजधानी दिल्ली पहुँचने वाले हैं.
शिराक ने कहा कि फ्रांस ऐसा पहला देश रहा है जिसने परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष लिया और उसे एक ज़िम्मेदार शक्ति बताया जिसके पास असैनिक परमाणु तकनीक है.
ज़्याक शिराक ने कहा कि 18 जुलाई 2005 को अमरीका और भारत के बीच परमाणु समझौते के बाद फ्रांस ने इस मुद्दे पर भारत के साथ बातचीत शुरू की थी और यह अमरीकी प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण देशों के सहयोग से आज भी जारी है.
शिराक ने कहा, "हम परमाणु समझौते के काफ़ी नज़दीक हैं लेकिन दोनों पक्षों को अभी काफ़ी कुछ करना बाक़ी है."
यह पूछे जाने पर कि क्या इस देरी के लिए वह भारत को ज़िम्मेदार मानते हैं, शिराक ने कहा, "चूँकि यह बहुपक्षीय मुद्दा है, फ्रांस मज़बूती से भारत के साथ खड़ा है."