सोमवार, 13 फ़रवरी, 2006 को 08:42 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने फ़्रांस के युद्धपोत क्लेमांसु को भारत की सीमा में आने से रोक दिया है और कहा है कि इसके बारे में फ़ैसला अब रक्षा मंत्रालय की राय आने के बाद किया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही एक समिति की रिपोर्ट को रद्द करते हुए रक्षा मंत्रालय से एक समिति गठित करने को कहा है.
अदालत ने तब तक के लिए इसके पक्ष या विरोध में किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगाते हुए कहा है कि यदि कोई प्रदर्शन करता है तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा.
इस पोत पर बड़ी मात्रा में एस्बेस्टस लगा होने के कारण भारत में काफ़ी विवाद छिड़ा हुआ है क्योंकि उसे टुकड़ों में तोड़ने के लिए भारतीय तट पर लाया जाना है.
पर्यावरणवादी संगठन ग्रीनपीस का कहना है कि क्लेमांसु नाम के इस पोत पर सैकड़ों टन एस्बेस्टस लगा है इसलिए उसका भारत जाना ठीक नहीं है.
ग्रीनपीस का कहना है कि एस्बेस्टस की वजह से भारतीय तट पर काम करने वाले कामगारों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
उधर फ्रांस ने पहले ही घोषणा की है कि वह अपने पुराने युद्धपोत पर लगे एस्बेस्टस को वापस लेने को तैयार है.
फ़ैसला
पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस पोत के भारत आने पर रोक लगाते हुए एक समिति गठित की थी.
लेकिन दस सदस्यों की इस समिति में इस बात को लेकर मतभेद थे कि पोत में हानिकारक पदार्थ हैं या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट की दस सदस्यीय समिति ने बहुमत के आधार पर दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पोत को भारतीय बंदरगाह पर आने की अनुमति दी जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति की रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा है कि ये कोई विशेषज्ञ समिति नहीं थी और इसके लिए सरकार की ओर से रक्षा मंत्रालय को यथाशीध्र एक समिति बनाकर इसकी रिपोर्ट देनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस समिति में चार से पाँच सदस्य होने चाहिए.