गुरुवार, 09 फ़रवरी, 2006 को 23:04 GMT तक के समाचार
बांग्लादेश की एक अदालत ने नवंबर 2005 में हुए बम धमाकों के आरोप में तीन लोगों को 30 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है.
इन लोगों पर नवंबर 2005 में झलकाठी ज़िले में बम हमले करने का आरोप है. हमले में दो जजों की मौत हो गई थी.
जिन लोगों को सज़ा सुनाई गई है उनका संबंध जमाकुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) नामक संगठन से बताया गया है.
बारिसाल शहर में एक विशेष अदालत में इन लोगों को सज़ा सुनाई गई.
पुलिस ने इनमें से एक को भावी आत्मघाती हमलावर बताया था क्योंकि गिरफ़्तार किए जाते वक़्त उनके शरीर पर विस्फोटक बंधे हुए थे.
हसन अल-मामून नामक व्यकंति को 10 अतिरिक्त वर्षों के लिए जेल में रखने का आदेश दिया गया है. अल-मामून पर आरोप है कि उसी ने जजों पर बम फेंका था.
तीनों अभियुक्तों पर अलग से हत्या का मामला में चल रहा है, जिसमें दोषी पाए जाने पर उन्हें मौत की सज़ा सुनाई जा सकती है.
शरिया क़ानून के लिए आंदोलन
बांग्लादेश में हाल के महीनों में कई बम हमलों में जेएमबी का हाथ बताया जाता है.
इससे पहले किशोरगंज़ ज़िले की एक अदालत में बम रखने के आरोप में गिरफ़्तार जेएमबी के एक कथित सदस्य को 15 साल की क़ैद की सज़ा सुना चुकी है.
बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में पिछले अगस्त के बाद से हुए बम हमलों में 30 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
जेएमबी और एक अन्य चरमपंथी इस्लामी संगठन जगराता मुस्लिम जनता बांग्लादेश में शरिया क़ानून लागू करने के लिए आंदोलन कर रही है.
जगराता बांग्लादेश पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रहा है.