बुधवार, 08 फ़रवरी, 2006 को 10:06 GMT तक के समाचार
फ्रांस ने घोषणा की है कि वह अपने पुराने युद्धपोत पर लगे एस्बेस्टस को वापस लेने को तैयार है.
इस पोत पर बड़ी मात्रा में एस्बेस्टस लगा होने के कारण भारत में काफ़ी विवाद छिड़ गया था क्योंकि उसे टुकड़ों में तोड़ने के लिए भारतीय तट पर लाया जा रहा था.
पर्यावरणवादी संगठन ग्रीनपीस का कहना है कि क्लेमांसु नाम के इस पोत पर सैकड़ों टन एस्बेस्टस लगा है इसलिए उसका भारत जाना ठीक नहीं है.
ग्रीनपीस का कहना है कि एस्बेस्टस की वजह से भारतीय तट पर काम करने वाले कामगारों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
भारत में फ्रांस के राजदूत डोमिनिक जेराड ने कहा है कि उनका देश भारतीय सरकार और अदालत के फ़ैसले को मानेगा.
डोमिनिक जेराड ने गुजरात में अलंग में जहाज़ तोड़ने के यार्ड का दौरा करने के बाद यह बात कही है, अलंग दुनिया भर में पुराने जहाज़ों को तोड़ने का सबसे बड़ा यार्ड है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा, "भारत पर दबाव डालने का तो सवाल ही नहीं उठता."
उन्होंने ये भी कहा कि जहाज़ को तोड़ने का काम जहाँ भी होगा वहाँ कामगारों की सेहत पर नज़र रखने के लिए फ्रांसीसी डॉक्टर मौजूद रहेंगे.
ग्रीनपीस कई महीनों से इस पोत के भारत आने का विरोध कर रही है, फ्रांस का कहना था कि उसने जहाज़ से एस्बेस्टस हटा लिया है लेकिन ग्रीनपीस का कहना है कि पोत पर अब भी सैकड़ों टन एस्बेस्टस मौजूद है.
मामला अदालत में गया और भारत की सुप्रीम कोर्ट ने पोत के भारतीय जल सीमा में घुसने पर तब तक के लिए रोक लगा दी जब तक कि एक विशेषज्ञ समिति इस बात की पुष्टि न कर दे कि जहाज़ पर कोई हानिकारक पदार्थ नहीं है.