रविवार, 05 फ़रवरी, 2006 को 05:13 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान में वैधानिक शासन लागू करना और संसद की संप्रभुता बहाल करवाना अब सबसे बड़ा एजेंडा होना चाहिए.
बीबीसी को दिए साक्षात्कार में नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि ये काम बहुत आसान हो जाएगा अगर पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और दूसरी राजनीतिक पार्टियाँ भी उनका साथ दें.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो ने देश में लोकतंत्र बहाली के लिए पिछले साल एक तीन सूत्री समझौते पर दस्तख़त किए थे.
दोनों नेताओं के बीच यह समझौता सऊदी अरब के शहर जद्दाह में हुआ था.
सेना की भूमिका
बीबीसी के साथ बीतचीत में नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान में फ़ौज की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था, "सेना में शामिल होते समय फ़ौजी शपथ लेते हैं कि वे सियासत से दूर रहेंगे, फिर क्यों ये लोग शपथ को तोड़ते हैं, कौन जबाव देगा इसका."
नवाज़ शरीफ़ को सत्ता से हटाए जाने के कुछ महीने बाद ही एक समझौते के तहत सऊदी अरब भेज दिया गया था.
पाकिस्तान में जेल में बिताए दिनों के बारे में नवाज़ शरीफ़ ने बताया कि उन्होंने 14 महीने जेल में काटे और कोई ये नहीं कह सकता कि उन्होंने बुज़दिली से जेल काटी.
नवाज़ शरीफ़ ने बताया, "जहाँ मुझे रखा गया था वहाँ के सारी खिड़कियाँ और दरवाज़े काले कर दिए गए थे, न दिन का पता चलता था न रात का, न कोई घड़ी थी, न रेडियो या टेलीवीज़न."
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बताया कि पानी माँगने के लिए उन्हें दरवाज़ा खटखटाना पड़ता था क्योंकि दरवाज़े पर ताला रहता था.
करगिल युद्ध के बारे में नवाज़ शरीफ़ ने बताया कि इस बारे में सिर्फ़ जनरल मुशर्रफ़, जनरल महमूद, कमांडर जावेद हसन और जनरल अज़ीज़ को ही जानकारी थी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी वायु सेना और जल सेना के प्रमुखों को भी इस बारे में नहीं पता था.
तख़्ता पलट
पाकिस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ़ ने 1999 में नवाज़ शरीफ़ सरकार का तख़्ता पलट दिया था.
1999 के घटनाक्रम के बारे में बोलते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि जनरल मुशर्रफ़ के कहने पर उन्होंने जनरल तारिक़ परवेज़ को हटाया था. लेकिन बाद में मीडिया में ख़बरें आईं कि नवाज़ शरीफ़ से मिलने की वजह से जनरल मुशर्रफ़ ने तारिक़ परवेज़ को हटाया है.
नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि उन्होंने जनरल मुशर्रफ़ से कहा था कि वे इस ख़बर का खंडन करें लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिससे उन्हें काफ़ी दुख हुआ. जनरल मुशर्रफ़ उस वक़्त श्रीलंका में थे.
इसके बाद तेज़ी से हुए घटनाक्रम में सैनिक विद्रोह के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवाज़ शरीफ़ को हटाकर स्वयं सत्ता हाथ में ले ली थी.
फिर नवाज़ शरीफ़ पर चले मुक़दमे में उन्हें देशद्रोह और करों की चोरी के आरोपों में उम्र क़ैद की सज़ा सुना दी गई.
लेकिन अगले साल उनकी सज़ा माफ़ कर दी गई और नवाज़ शरीफ़ को सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया.
नवाज़ शरीफ़ वर्ष 2000 से ही सऊदी अरब मे निर्वासन का जीवन बिता रहे हैं.समझौते के तहत नवाज़ शरीफ़ 2010 तक पाकिस्तान वापस नहीं लौट सकते हैं.
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा है कि पाकिस्तान में जो हो रहा है उसका हिसाब जनता लेगी और इसका समय आ गया है.