शनिवार, 04 फ़रवरी, 2006 को 10:04 GMT तक के समाचार
लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने संसद में रिश्वत लेकर सवाल पूछने के मामले में सांसदों को बर्ख़ास्त करने के सदन के फ़ैसले पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस को 'ग़ैरज़रूरी' बताया है.
सोमनाथ चटर्जी ने इस मामले के संबंध में विधानसभा और विधानपरिषदों अध्यक्षों की एक बैठक शनिवार को दिल्ली में बुलाई थी.
ग़ौरतलब है कि संसद ने घूस लेकर सवाल पूछने के मामले में 11 सांसदों की सदस्यता समाप्त कर दी थी.
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा,'' अदालत के पूरे सम्मान के साथ मैं महसूस करता हूँ कि सबसे पहले अदालत यह फ़ैसला करती कि उसके पास इस मामले की सुनवाई का संवैधानिक अधिकार है या नहीं.''
उनका कहना था,'' जब तक इस बात का फ़ैसला नहीं हो जाता, तब तक संसद को बर्ख़ास्त करने का अधिकार है या नहीं, स्पीकर को नोटिस देने की ज़रूरत नहीं थी.''
साथ ही, सोमनाथ चटर्जी ने स्पष्ट किया कि उनकी अदालत से किसी तरह के टकराव की कोई मंशा नहीं है.
कुछ समय लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी इस मामले पर विचार के लिए सर्वदलीय बैठक आयोजित की थी.
उसमें भी सभी दलों की राय थी कि बर्ख़ास्तगी के मामले में अध्यक्ष को न तो सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देना चाहिए और न ही अदालत में पेश होना चाहिए.
बवाल
पिछले दिनों एक टीवी चैनल ने 11 सांसदों को सवाल पूछने के बदले कथित रूप से घूस लेते हुए दिखाया था.
उसके बाद मचे बवाल के बाद दोनों सदनों में विशेष समितियों का गठन हुआ था जिन्होंने सांसदों के बर्ख़ास्तगी की सिफ़ारिश की थी.
फिर उस पर मतदान के बाद यह तय हुआ था कि लोकसभा के 10 और राज्यसभा के एक सदस्य की सदस्यता समाप्त कर दी जानी चाहिए.
इसके बाद बर्ख़ास्त सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कर दिया.
लेकिन पिछले कुछ महीनो में यह दूसरी बार हुआ है कि सांसदों को अदालत के रवैये पर आपत्ति रही.
जब अदालतों ने निजी शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण के प्रस्ताव पर आपत्ति व्यक्त की थी तब भी संसद ने नया क़ानून पारित करना उचित समझा था.