शनिवार, 04 फ़रवरी, 2006 को 13:23 GMT तक के समाचार
भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शिकायत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से करने की बात कही गई है.
भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह प्रस्ताव संतुलित है और इसमें विकासशील देशों के कई संशोधनों को स्वीकार किया गया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम चाहते हैं कि इस मामले पर टकराव टाला जाए और बातचीत के जरिए ही इसका हल निकाला जाए.
भारत का कहना है कि प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने से ईरान के साथ पारंपरिक रूप से दोस्ताना रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
बयान में कहा गया है कि उसने ईरान से अनुरोध किया कि वह आईएईए के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करे.
'रिश्ते अच्छे रहेंगे'
भारत के फ़ैसले के बारे में आईएईए में भारत के विशेष दूत शीलकांत शर्मा ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि "यह बहुपक्षीय मामला है ईरान से अच्छे रिश्ते हमेशा की तरह बने रहेंगे."
उन्होंने बताया कि इसका यह मतलब नहीं लगाना चाहिए कि मामला सुरक्षा परिषद में चला गया है, "अभी छह सप्ताह का समय बाक़ी है, उस समय तक यह मसला आईएईए के भीतर ही है और कूटनीति प्रयास जारी रहेंगे."
आईएईए में भारत के विशेष दूत ने उम्मीद ज़ाहिर की कि अगर ईरान ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग करेगा तो यह मामला अब भी शांतिपूर्ण तरीक़े से हल हो सकता है.
भारतीय दूत का कहना है कि इस प्रस्ताव का मसौदा काफ़ी संतुलित था, हमने गुटनिरपेक्ष देशों के साथ मिलकर कुछ संशोधन के सुझाव दिए थे जिन्हें यूरोपीय देशों ने स्वीकार कर लिया है.
उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि भारत-ईरान पाइपलाइन के समझौते पर इससे कोई असर नहीं पड़ेगा.
कूटनीति के जानकार इसको अमरीका के भारत पर दबाव के रूप में देखते हैं क्योंकि भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड ने कुछ दिनों पहले कहा था कि अगर भारत ने आईएईए की बैठक में ईरान के रुख़ का समर्थन किया तो उसके साथ परमाणु समझौते पर असर पड़ सकता है.
हालांकि भारत ने इस बात को ठुकरा दिया था और अमरीकी राजदूत से इस बयान पर सफ़ाई माँगी थी.