शुक्रवार, 03 फ़रवरी, 2006 को 11:51 GMT तक के समाचार
मध्य प्रदेश में विवादित भोजशाला परिसर में शुक्रवार को पूजा और नमाज़ की ज़िद के कारण सामुदायिक तनाव के बाद धार शहर में जो कर्फ़्यू लगाया गया था उसे हटा लिया गया है.
प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि बिना कर्फ़्यू के भीड़ को नियंत्रित करना और मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने देना संभव नहीं था.
मंत्री ने कहा कि कर्फ़्यू के बाद अब वहाँ हिंदू श्रद्धालुओं ने फिर से पूजा शुरू कर दी है.
इससे पहले पुलिस ने हिंदू धर्मावलंबियों को विवादित स्थान से हटाने के लिए लाठी भी चलाई लेकिन इसमें सफ़लता न मिलने के बाद प्रशासन ने कर्फ़्यू लागू कर दिया था.
मध्य प्रदेश के धार शहर में स्थित भोजशाला एक विवादित पूजा स्थल है और यहाँ इससे पहले भी सांप्रदायित तनाव की स्थिति बनती रही है. वर्ष 2003 में भी वहाँ कर्फ़्यू लागू करना पड़ा था.
दरअसल, इस साल वसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी है. हिंदू इस दिन यहाँ विशेष पूजा का आयोजन करते हैं.
दूसरी ओर, सरकार की व्यवस्था के अनुसार हर शुक्रवार को मुसलमान नमाज़ अदा करने के लिए जमा होते हैं.
लाठीचार्ज
इस समय मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है और कर्फ़्यू लागू होने के कुछ देर पहले भाजपा के एक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि यह एक ऐतिहासिक दिन होगा जब लोग पूजा भी करेंगे और नमाज़ भी अदा होगी.
लेकिन ऐसा हो नहीं सका.
दरअसल, हिंदू संगठनों ने वहाँ सरस्वती पूजा पर एक बड़ा आयोजन किया था और इसके लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे.
प्रशासन का प्रयास था कि हिंदू अपने निर्धारित समय के बाद उस जगह को खाली कर दें जिससे नमाज़ अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग वहाँ आ सकें.
हिंदू कार्यकर्ताओं को वहाँ से हटाने से असफल रहने पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
इसके बाद प्रशासन ने स्थिति बिगड़ती देखकर कर्फ़्यू लगा दिया.
प्रशासन को सांप्रदायिक तनाव की आशंका पहले से ही थी और इसके लिए दो-तीन दिन पहले से ही तैयारियाँ की गई थीं.
इतिहास और व्यवस्था
भारतीय पुरातत्व विभाग ने हिंदुओं को सुबह और शाम को पूजा करने और मुसलमानों को दिन में एक से तीन के बीच नमाज़ का समय दिया था.
लेकिन हिंदूवादी संस्थाएँ यह माँग कर रही हैं कि मुसलमान इस शुक्रवार को वहाँ नमाज़ अदा न करें. मुस्लिम संगठन इसके लिए तैयार नहीं हैं.
भोजशाला में ग्यारहवीं सदी का एक पुरातात्विक स्मारक है. इसे हिंदू सरस्वती का मंदिर मानते हैं और मुसलमान मस्जिद.
परंपरागत ढंग से वहाँ साल में सिर्फ़ एक बार सरस्वती की पूजा होती रही है और मुसलमान हर शुक्रवार को नमाज़ अदा करते रहे हैं.
लेकिन सन् 2003 में हिंदू जागरण मंच ने हिंदुओं के वहाँ नियमित प्रवेश की माँग को लेकर एक आंदोलन शुरु किया था.
यह आंदोलन हिंसक हो उठा था और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था. इसके कारण धार में लगातार कई दिनों तक कर्फ़्यू लगाना पड़ा था.