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बुधवार, 01 फ़रवरी, 2006 को 15:31 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, काठमांडू

नेपाल में विरोध प्रदर्शन और हिंसा

नेपाल में लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त करने की वर्षगाँठ पर राजधानी काठमांडू सहित देशभर में प्रदर्शन हुए. नेपाल नरेश ने ठीक एक साल पहले सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.

इस बीच ख़बर है कि पालपा ज़िला मुख्यालय पर हमला करके माओवादियों ने कई लोगों की हत्या कर दी है और ज़िलाधिकारी समेत कई लोगों को बंधक बना लिया है.

पुलिस ने देशभर में लोकतंत्र समर्थकों की गिरफ़्तार किया. गिरफ़्तारी देने वालों में पत्रकार, शिक्षक और दूसरे ग़ैर राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हैं.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की जनमुक्ति सेना के एक कमांडर प्रभाकर शर्मा का कहना है कि उनके साथियों ने पार्टी के निर्देश पर ज़िला मुख्यालय और सेना के कैंप पर हमला किया.

प्रभाकर शर्मा का कहना है कि हमले में शाही सेना और पुलिस के 45 लोग मारे गए हैं. इनके अलावा तीन सैनिक, 20 पुलिस प्रहरी और ज़िलाधिकारी को बंधक बना लिया गया है.

दावा

प्रभाकर शर्मा का कहना है कि यह हमला नेपाल नरेश के शासन को चुनौती देने के लिए किया गया है. दूसरी ओर राजधानी काठमांडू में सेना के एक प्रवक्ता ने कहा है कि इस हमले में 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और चार माओवादियों के भी शव बरामद हुए हैं.

सेना का कहना है कि हताहतों में माओवादियों की संख्या ज़्यादा हो सकती है. इधर नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी समेत सात प्रमुख विपक्षी दलों के आह्वान पर देशभर में बुधवार को काला दिवस मनाया गयाय

प्रशासन ने कई शहरों में कर्फ़्यू जैसी स्थिति पैदा करके प्रदर्शन को नाकाम करने की कोशिश की. फिर भी दिनभर विरोध प्रदर्श और गिरफ़्तारियों का सिलसिला चलता रहा.

नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने बुधवार सुबह टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए यह आश्वासन दिया था कि वे अगले साल तक संसदीय चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

नेपाल नरेश ने एक साल में स्थिति में सुधार का दावा करते हुए आठ फरवरी को प्रस्तावित नगर निगम चुनाव में भागीदारी की अपील की.

उन्होंने देश की जनता से प्रजातंत्र की बहाली में साथ देने का आह्वान किया. लेकिन प्रमुख विपक्षी दलों और लोकतंत्र समर्थकों ने उनके संबोधन ख़ारिज कर दिया.