गुरुवार, 02 फ़रवरी, 2006 को 09:15 GMT तक के समाचार
पाणिनी आनंद
दिल्ली से
केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी, राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना गुरुवार से लागू हो गई है. शुरुआती तौर पर यह योजना देश के 200 ज़िलों में लागू की जा रही है.
मनमोहन सिंह ने बुधवार को माना था कि ग्रामीण रोज़गार योजना अब तक के उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी दूर करने के उद्देश्य से लाया गया राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना विधेयक 23 अगस्त, 2005 को लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया था.
इसके पारित होने के लगभग छह महीनों बाद यह लागू हुई है.
लागू करने में इतना समय की वजह इसकी तैयारियों को बताया गया है.
संशय
हालाँकि इसके लागू होने को लेकर जनसंगठन कुछ सवाल भी उठा रहे हैं.
जन संगठनों के मुताबिक इसके पहले ज़रूरी प्रचार-प्रसार मे तो कमी रही ही है, साथ ही स्थानीय केंद्रों पर भी अभी सरकारी मशीनरी इसके लिए तैयार नहीं दिखती.
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई राज्यों में सत्तारूढ़ गठबंधन की सरकार का सत्ता में न होना भी इसमें एक अड़चन पैदा कर सकता है.
रोज़गार गारंटी अभियान के कार्यकर्ता निखिल डे ने बीबीसी को बताया, "सरकार ने पारित प्रस्ताव में कुछ तब्दीलियां की हैं जिससे योजना और भी मज़बूत हुई है और इसका लाभ लोगों को मिलेगा पर ज़मीनी स्तर पर यह ठीक प्रकार से लागू हो सकेगा, इसे लेकर संदेह है."
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से रोज़गार कार्ड छप गए हैं और कई तरह के ज़रूरी फ़ार्म भी तैयार कर लिए गए हैं पर ये सब सामग्री लोगों को लागू होते ही उपलब्ध हो पाएगी, ऐसा नहीं लगता है.
उन्होंने ग्रामीण स्तर पर सरकारी महकमे की इस योजना को लेकर की गई तैयारियों पर भी सवाल उठाए.
योजना
केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन की इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गार उपलब्ध करवाया जाएगा.
शुरुआती तौर पर इस योजना के लिए लगभग छह हज़ार करोड़ रुपए की राशि रखी गई है.
जिन जगहों पर यह योजना लागू हो रही है, वहाँ योजना के तहत दैनिक मजदूरी का भुगतान राज्यों में तय न्यूनतम मजदूरी के बराबर होगा.
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन ज़िलों के चयन का काम योजना आयोग को सौंपा गया है.
चयनित 200 ज़िलों में अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, ज़िले की उत्पादकता और इसी तरह के कई बिंदुओं को आधार बनाकर इनका चयन किया गया है.
इसको लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी. रोज़गारी गारंटी विधेयक के प्रावधानों के तहत इस योजना पर ग्राम सभा का नियंत्रण और निगरानी होगी.