बुधवार, 01 फ़रवरी, 2006 को 08:38 GMT तक के समाचार
हज़ारों कर्मियों की देशव्यापी हड़ताल के बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के निजीकरण के फ़ैसले को मंज़ूरी दे दी है.
अपनी घोषणा के अनुसार हवाई अड्डा कर्मचारियों ने बुधवार की सुबह से काम रोक दिया है जबकि अधिकारी भूख हड़ताल पर चले गए हैं.
मंगलवार को निविदाएँ खोलने के बाद नागरिक विमानन और उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली और मुंबई के हवाईअड्डों को निजी हाथों में देने की घोषणा की थी.
सरकार के इस क़दम का वामपंथी दल भी विरोध कर रहे हैं.
मंत्रिमंडल की मंज़ूरी
मंगलवार की सुबह तक इस बात को लेकर असमंजस था कि सरकार हवाई अड्डों के निजीकरण को लेकर आगे बढ़ेगी या नहीं लेकिन दोपहर बाद जब निविदाएँ खुल ही गईं तो निजीकरण तय हो गया.
निविदाएँ खुलने के बाद सरकार ने घोषणा कर दी थी कि दिल्ली का विमानतल अब जीएमआर के हाथों में होगा और सरकार को आय का 46 प्रतिशत मिलेगा.
जबकि मुंबई का हवाई अड्डा जीवीके कंपनी के हाथों में चला जाएगा जिसने सरकार को 39 प्रतिशत लाभांश देने का वादा किया है.
सरकार ने केंद्रीय विमानन मंत्रालय के इस सौदे को मंज़ूरी दे दी है और इसके साथ ही भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के कर्मचारियों की ये आस भी टूट गई है कि शायद हड़ताल के दबाव में सरकार इस सौदे को मंज़ूरी न दे.
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कर्मचारियों की हड़ताल पर कहा कि लोकतंत्र में ये हर किसी का अधिकार है कि वह अपना विरोध जताए.
उन्होंने हड़ताल रोकने के लिए आवश्यक सेवा क़ानून लागू न करने के विमानन मंत्री प्रफ़ुल्ल पटेल के आश्वासन को दोहराया है.
हालाँकि कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार हवाई अड्डों के निजीकरण का अपना निर्णय वापस नहीं ले लेती वे हड़ताल करते रहेंगे.
वैसे विमानन मंत्री प्रफ़ुल्ल पटेल ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि निजीकरण के बाद भी उनके हितों पर कोई आँच न आए.
लेकिन कर्मचारी नेता कह रहे हैं कि वे मंत्री के इस आश्वासन पर भरोसा नहीं करते.