मंगलवार, 31 जनवरी, 2006 को 13:40 GMT तक के समाचार
पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय नगा विद्रोही संगठन नैशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड, (एनएससीएन) ने कहा है कि वह भारत सरकार के साथ संघर्षविराम "न चाहते हुए" छह महीने के लिए बढ़ाने पर सहमत हुआ है.
एनएससीएन और भारत सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पिछले चार दिन से बैंकॉक में बातचीत चल रही थी.
एनएससीएन के प्रवक्ता सैमसन जोजो ने मंगलवार को कहा, "हम शांति को एक और आख़िरी मौक़ा देना चाहते हैं. हमें उम्मीद है कि भारत सरकार छह महीने की इस अवधि को नगा समस्या का कोई स्थाई हल निकालने के लिए इस्तेमाल करेगी अन्यथा अंतहीन समय तक बातचीत करने से कोई फ़ायदा नहीं है."
चार दिन की बातचीत में पहले तीन दिन तो कोई नतीजा नहीं निकला लेकिन चौथे और अंतिम दिन एनएससीएन के नेताओं ने आख़िरकार भारत सरकार का अनुरोध स्वीकार कर लिया कि संघर्षविराम छह महीने के लिए बढ़ा दिया जाए.
इस तरह एनएससीएन ने संघर्षविराम 31 जुलाई 2006 तक बढ़ा दिया है.
पूर्वोत्तर भारत में बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि एनएससीएन ने नगालैंड बनाने की अपनी मुख्य माँग पर काफ़ी ज़ोर दिया.
ग़ौरतलब है कि एनएससीएन की माँग है कि भारत सरकार मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के नगा बहुल इलाक़ों को मिलाकर एकीकृत नगालैंड बनाए.
एनएससीएन के प्रवक्ता सैमसन जोजो ने सोमवार को कहा था कि शांति वार्ता का कोई नतीजा निकलना चाहिए, “बातचीत की प्रक्रिया 1997 से चल रही है लेकिन सिर्फ़ बातचीत करते रहने का कोई फ़ायदा नहीं है, राजनीतिक प्रस्तावों पर भारत सरकार को बातचीत में आगे बढ़ना चाहिए और किए गए वादे निभाए जाने चाहिए.”
प्रवक्ता ने कहा, “हमने इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण फ़ैसले किए हैं. हम पूर्ण स्वतंत्रता की माँग से पीछे हटे हैं और भारतीय संघ के साथ विशेष रिश्ता रखने की बात मानी है लेकिन हमारी बातें मानी नहीं जा रहीं.”