मंगलवार, 31 जनवरी, 2006 को 14:25 GMT तक के समाचार
हथियार और रक्षा उपकरण बनाने वाली दुनिया की कई बड़ी कंपनियों की प्रदर्शनी इन दिनों दिल्ली में चल रही है.
ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इसराइल, रूस और अमरीका की कई कंपनियाँ अपने हथियारों, गोला-बारूद से लेकर तोपों-टैंकों को प्रदर्शित कर रही हैं.
चार दिन की इस प्रदर्शनी 300 से अधिक कंपनियाँ हिस्सा ले रही हैं, इसका उदघाटन करते हुए रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इन कंपनियों से कहा कि वे भारत में साझीदार के तौर पर अपने उत्पाद बनाएँ.
भारत दुनिया में परंपरागत हथियारों के सबसे बड़े ख़रीदारों में से एक है, वर्ष 2004 में भारत ने लगभग छह अरब डॉलर के हथियार ख़रीदे थे जो चीन से अधिक है.
लॉकहीड मार्टिन, बोइंग और रॉल्स रॉयस जैसी कंपनियाँ इस प्रदर्शनी में शामिल हो रही हैं.
भारत के रक्षा मंत्री ने कहा, "हमारी रक्षा उत्पादन से जुड़ी कंपनियाँ काफ़ी पेशेवर तरीक़े से काम करती हैं और अगर भारत में साझीदारी में उत्पादन होता है तो उत्पाद को अन्य देशों में बेचा जा सकता है."
भारतीय रक्षा मंत्रालय अगले कुछ वर्षों में आठ अरब डॉलर की रक़म ख़र्च करने वाला है, भारत लड़ाकू जेट विमान और मिसाइल उत्पादन प्रणाली ख़रीदना चाहता है.
भारत लगभग 100 से अधिक जेट लड़ाकू विमान ख़रीदना चाहता है ताकि रूसी जेट विमानों को धीरे-धीरे लड़ाकू दस्ते से हटाया जा सके.
अमरीका, रूस, फ्रांस और स्वीडन भारत को लड़ाकू विमान बेचने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं.