मंगलवार, 31 जनवरी, 2006 को 17:49 GMT तक के समाचार
मज़दूर यूनियनों का कहना है कि दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी बुधवार सुबह से हड़ताल पर चले जाएंगे.
इस हड़ताल से देशभर की विमान सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं.
वामपंथी ट्रेड यूनियन सीटू के महासचिव एमके पंधे ने बीबीसी को बताया,'' भारतीय विमानपत्तन के 20 हज़ार से अधिक कर्मचारी बुधवार सुबह से हड़ताल पर चले जाएँगे.''
उनका कहना था,'' सरकार हमारी बात नहीं सुन रही हैं इसलिए हमारे पास हड़ताल के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है.''
पंधे का कहना था कि लोगों की नौकरी नहीं जाएगी, उड्डयन मंत्री इस बारे में सच नहीं बोल रहे हैं.
कर्मचारियों को आशंका है कि निजीकरण के कारण उनकी नौकरियाँ जा सकती हैं.
आशंकित कर्मचारी
नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने पत्रकारवार्ता में कर्मचारियों के आशंका को दूर करने की कोशिश की.
उनका कहना था कि सरकार इस बात के पूरे प्रयास करेगी कि लोगों की नौकरियाँ न जाएँ.
पटेल का कहना था कि साठ फ़ीसदी से अधिक कर्मचारी दोनों हवाई अड्डों में काम पा जाएँगे.जिन्हें नौकरी नहीं मिलेगी, उन्हें सरकार खपाएगी.
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने हड़ताल की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम किए हैं ताकि उड़ानें प्रभावित न हों.
विरोध कर रहे कर्मचारियों को वामपंथी दल समर्थन कर रहे हैं. वे यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं.
इसके पहले दिल्ली और मुंबई हवाई अडडों के आधुनिकीकरण का काम निजी कंपनियों को सौंपने के फ़ैसले को मंत्रियों के विशेष समूह ने अपनी मंज़ूरी दे दी थी. बुधवार को इसे मंत्रिमंडल से पारित करवाने के लिए पेश किया जाएगा.
इस घोषणा से पहले ही वामपंथी कर्मचारी संगठनों से जुड़े सैकड़ों कर्मचारी इसके विरोध में अपने दफ़्तरों को छोड़कर सड़कों पर निकल आए.
दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का ठेका जीएमआर-फ्रैपोर्ट को मिला है जबकि मुंबई का ठेका जीवीके-साउथ अफ्रीका को.