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सोमवार, 30 जनवरी, 2006 को 01:24 GMT तक के समाचार

नवाज़ शरीफ़ लंदन में, मुशर्रफ़ को कोसा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ अपने बीमार बेटे को देखने के लिए रविवार रात लंदन पहुँचे जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की तीखी आलोचना की.

नवाज़ शरीफ़ वर्ष 2000 से ही सऊदी अरब मे निर्वासन का जीवन बिता रहे हैं. 1999 में एक सैनिक विद्रोह के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवाज़ शरीफ़ को हटाकर स्वयं सत्ता हाथ में ले ली थी.

तब से वे सऊदी अरब में ही रह रहे हैं और अब अपने 28 वर्षीय बेटे हसन शरीफ़ को देखने लंदन पहुँचे हैं जिनका इंग्लैंड में किसी ऐसी बीमारी का इलाज चल रहा है जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया है.

लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर नवाज़ शरीफ़ के स्वागत के लिए लगभग 800 से 1000 समर्थक जुटे.

काफ़ी अफ़रा-तफ़री के बीच नवाज़ शरीफ़ ने हवाई अड्डे से थोड़ी दूर लंदन के स्लाव इलाक़े में एक सभा में अपने समर्थकों को संबोधित किया.

मुशर्रफ़ पर वार

नवाज़ शरीफ़ ने लंदन पहुँचकर कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने सारी दुनिया में पाकिस्तान का नाम ख़राब किया है.

उन्होंने क़दीर ख़ान मामले का ज़िक्र करते हुए कहा,"दुनिया क़दीर ख़ान को नहीं जानती, पाकिस्तान को जानती है, नाम पाकिस्तान का ख़राब हुआ है".

मुस्लिम लीग नेता शरीफ़ ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि वह अमरीका के इशारों पर चल रही है.

उन्होंने कहा,"आज हम ग़ैरों के कपड़े धो रहे हैं, ये भी कोई इज़्ज़त है?".

लोकतंत्र और संविधान

नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान के पड़ोसी भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए ये गौरव की बात है कि उसने 1947 के विभाजन के बाद से लोकतंत्र की परंपरा बनाए रखी है.

मुस्लिम लीग नेता ने अफ़सोस जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के बनने के बाद से अभी तक के आधे समय वहाँ सैनिक शासकों ने राज किया.

उन्होंने कहा," पाकिस्तान का भी एक संविधान था, ये कौन होते हैं उसका हुलिया बिगाड़नेवाले, संविधान की इज़्ज़त करना हम पूरी क़ौम को भी सिखाएँगे और इन जरनैलों को भी सिखाएँगे".

उन्होंने कहा,"परवेज़ मुशर्रफ़ को ये फ़ैसला करना है कि पाकिस्तान में क्या वहाँ के आम लोगों का राज चलेगा या कुछ गार्डों का".

उन्होंने अपनी सरकार गिराए जाने का विरोध करते हुए कहा, "मुझे बताया जाए कि हमारी हुक़ूमत को ख़त्म क्यों किया गया, क्या वजह थी? नवाज़ शरीफ़ क्या पाकिस्तान का दुश्मन था, क्या उसने परमाणु हथियारों की सौदेबाज़ी की थी, क्या वो किसी दूसरे देश का जासूस था."

नवाज़ शरीफ़ को 1999 में सत्ता से बाहर किए जाने के बाद देशद्रोह और करों की चोरी के आरोपों में उम्र क़ैद की सज़ा सुना दी गई थी.

लेकिन अगले साल उनकी सज़ा माफ़ कर दी गई लेकिन उनको सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया.