सोमवार, 30 जनवरी, 2006 को 13:36 GMT तक के समाचार
भारत में अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़र्ड के बयान को लेकर राजनीति गरमाने लगी है.
एक ओर तो केंद्र की सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने मलफ़र्ड को वापस भेजने की मांग की है तो विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग की है.
वामपंथी दलों का कहना है कि अमरीकी राजदूत भारत के अंदरूनी मामलों में दख़ल दे रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि अमरीकी राजदूत मलफ़र्ड ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान के परमाणु मामले में भारत अगर अमरीका का साथ नहीं देता है तो परमाणु संधि पर अमरीकी संसद अडंगे लगा सकती है.
इसके बाद डेविड मलफ़र्ड ने कहा कि रिटेल मामलों में एफ़डीआई को लेकर वामपंथी दल जो विरोध कर रहे हैं वह ठीक नहीं है.
वामदलों के नेताओं ने इस मामले पर नाराज़गी जताते हुए कहा है, "अमरीकी राजदूत ने भारत के अंदरूनी मामलों में दख़लंदाज़ी की है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है."
सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "हम यह मामला पहले से उठाते रहे हैं और भारत सरकार को चाहिए कि वो अमरीका सरकार से मलफ़र्ड को बुलाने के लिए कहे."
सीपीआई के सचिव डी राजा ने कहा, "डेविड मलफ़र्ड ने अपनी सभी सीमाएँ लाँघ ली हैं, पहले उन्होंने ईरान के मसले पर भारत की विदेश नीति पर सुझाव दिए और अब आर्थिक नीति पर वह राजनीतिक दलों को बता रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए क्या नहीं."
उधर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि इस पूरे मसले पर सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए.
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा है कि मलफ़र्ड इस तरह के बयान देकर देश का अपमान कर रहे हैं.